न्यू इंडस्ट्रियल टाउनशिप (एनआईटी) में बने 60 फीसदी मकानों ने व्यावसायिक रूप धारण कर लिया है। अर्थात आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
इतने बड़े पैमाने पर न तो सीलिंग संभव है और न ही तोड़फोड़। नगर निगम के तोड़फोड़ विभाग ने कार्रवाई करने से हाथ खड़े कर लिए हैं। इस बाबत एक रिपोर्ट तैयार कर संयुक्त आयुक्त को सौंपी गई है। रिपोर्ट में वर्ष 2010 में बनाई गई आवासीय क्षेत्रों की रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत कदम उठाने की सिफारिश की गई है।
वर्ष 1950 में पांच ब्लॉकों में बसे एनआईटी को बसाया गया था। वर्ष 1954 में लोग आकर रहने लगे थे। यहां की कुल आबादी 90,000 के करीब है। एक अनुमान के मुताबिक एनआईटी-1, 2, 3 और 5 में 9500 के करीब आवासीय मकान बने हैं। इनमें से 60 फीसदी मकानों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
खुद नगर निगम के तोड़फोड़ विभाग ने इस बाबत एक रिपोर्ट तैयार की है। निगम के सहायक इंजीनियर बिल्डिंग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि रोजगार की कमी के कारण स्थानीय लोगों ने जीवकोपार्जन के लिए मकानों का उपयोग व्यावसायिक रूप में करना शुरू कर दिया है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर न तो सीलिंग की कार्रवाई संभव है और न ही तोड़फोड़ की।
2010 पॉलिसी के तहत नियमित करने की सिफारिश
आवासीय क्षेत्रों में चलने वाली व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने के लिए राज्य सरकार ने 10 अक्तूबर 2010 को एक पॉलिसी बनाई थी। इसमें 1500 से 2000 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर की दर से निगम में शुल्क जमाकर मकानों को नियमित कराया जा सकता था। इस पॉलिसी को वर्ष 2014 में खत्म कर दी गई। तोड़फोड़ विभाग की ओर से संयुक्त आयुक्त को सौंपी रिपोर्ट में कहा है कि ‘जहां है जैसा है’ के आधार पर 2000 से 3000 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर की दर से शुल्क लेकर मकानों को व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की अनुमति दे दी जानी चाहिए। इससे निगम की आय में भी बढ़ोत्तरी होगी।
शुल्क दर घटाने की मांग
आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर राज्य सरकार ने 6 अप्रैल 2016 को एक नई पॉलिसी बनाई। इसमें रेगुलराइजेशन शुल्क 15,325 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर निर्धारित किया है। एसोसिएशन फॉर जस्टिस का कहना है कि यदि किसी को 100 वर्ग गज के मकान को नियमित कराना है तो उसे 15 लाख रुपये जमा कराने होंगे, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। एसोसिएशन ने भी 1500 से 2000 रुपये तक शुल्क निर्धारित करने और पॉलिसी को सरल करने की मांग की है।
तोड़फोड़ विभाग की ओर से संयुक्त आयुक्त को दी गई रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी और सरकार को इससे अवगत कराया जाएगा। सरकार का जो भी निर्देश होगा, उसी अनुसार काम किया जाएगा। यदि सरकार रिपोर्ट को मानती है तो उसी आधार रेगुलराइज करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।- डॉ. आदित्य दहिया, निगमायुक्त