बीके अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1500 से 2000 मरीज इलाज कराने आते हैं। जिसमें से प्रतिदिन करीब 70 से 80 मरीज आपातकालीन वार्ड में आते हैं। कई मरीजों को ठीक से इलाज न मिलने पर उनको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है। गुरुवार को मरीज अंशू के पिता नरेंद्र ने बताया कि बुधवार की दोपहर में ही उसकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बाद उसे ऑटो से बीके अस्पताल लेकर आए थे। डॉक्टर ने उसे अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती करके इलाज शुरू किया।
वहीं, डॉक्टर ने इलाज के बाद हालत में सुधार न होने के कारण उसे दिल्ली के एम्स अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन मरीज को स्ट्रेचर पर लेटा कर आपातकालीन वार्ड के बाहर हाथ में ग्लूकोस की बोतल पकड़ कर एक घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। एक घंटे तक एंबुलेंस न आने के कारण मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
एंबुलेंस फ्लीट मैनेजर हरिकेश डागर ने बताया कि जिस मरीज को एंबुलेंस की जरूरत होती है। उसके लिए एंबुलेंस भेजा जाता है। जिसका रिकॉर्ड रजिस्टर में लिख दिया जाता है। मरीज अंशू के लिए भेजी गई एंबुलेंस की जानकारी रजिस्टर की जांच करके बताएंगे।