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मोहना और छायंसा में घर-घर जाकर लार्वा की हो रही जांच

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फरीदाबाद। बारिश के मौसम में डेंगू और मलेरिया ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। इसकी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में तेजी से अभियान शुरू कर दिया है। सबसे संवेदनशील गांव मोहना और छायंसा में घर-घर जाकर लार्वा की जांच की जा रही है। घरों में रुके हुए पानी को भी साफ कराया जा रहा है। इस कार्य में आशा कार्यकर्ता और एएनएम कर्मचारियों की भी सहायता ली जा रही है। अभी तक डेंगू के 19 और मलेरिया के सात मामले सामने आ चुके हैं, हालांकि, रविवार को डेंगू-मेलरिया का कोई नया मामला नहीं आया।
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पिछले करीब एक सप्ताह से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। बारिश के बाद सड़कों पर जगह-जगह पानी जमा हो गया है। घरों में छतों पर रखे बर्तनों में पानी जमा होने से डेंगू और मलेरिया का लार्वा पनप रहा है। वहीं, जिले में अभी तक मलेरिया के सात और डेंगू के 19 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से अधिकतर मोहना और यमुना से लगते गांव छायंसा से हैं। घरों में लोगों के बर्तनों, मटकों, हौदी, कूलर, टायर व अन्य जगह पानी भरा पाया गया।
इसमें मलेरिया के मच्छर पैदा होने का खतरा अधिक रहता है। स्वास्थ्य विभाग ने यमुना से सटे मोहना गांव को संवेदनशील गांव की श्रेणी में रखा है। वहीं, छायंसा को एहतियातन सावधानी रखने के लिए कहा गया है। दोनों जगह घर-घर जाकर लार्वा की जांच की जा रही है। यमुना से लगते कुछ गांवों में सर्वे का काम भी शुरू कर दिया है। घरों में लार्वा की जांच की जा रही है। लार्वा मिलने पर लोगों को नोटिस भी दिए जा रहे हैं।
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लापरवाही पड़ सकती स्वास्थ्य पर भारी
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामभगत ने बताया कि मोहना के घरों में लोगों ने पुराने बर्तनों, मटकों, पशुओं को पानी पिलाने के लिए बनाई गई हौदियों में पानी जमा कर रखा है। लोगों को जानकारी नहीं है कि इस तरह के पानी में मलेरिया का मच्छर पैदा होता है। हमारी टीमें घर-घर जाकर साफ करा रही हैं। लोगों को बचाव के बारे में जानकारी दे रही हैं। इसके साथ ही डेंगू के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के लिए लोगों को जानकारी दी जा रही है। बारिश रुकने के बाद पंचायतों को प्रशिक्षण देकर फॉगिंग कराई जाएगी। जिससे मच्छरों को पनपने से रोका जा सके।
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- डॉ. रामभगत, जिला मलेरिया अधिकारी
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