संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बिना जांचे परखे पैसे निवेश न करने और जल्दी पैसे कमाने की स्कीम में न फंसने के लिए पुलिस विभाग द्वारा लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। समय-समय पर पुलिस इसके लिए एडवाइजरी भी जारी करती है। इस सब के बावजूद लोग मुनाफे का लालच में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। इस बार एक ठग ने मुनाफे का लालच देकर क्राइम ब्रांच के उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) को ही 12 लाख का चूना लगा दिया। आरोपी ने पुलिस कर्मी को विश्वास दिलाया था कि वह बैंक से भी ज्यादा ब्याज देगा। पीड़ित की शिकायत एसजीएम नगर थाना की पुलिस जांच में जुटी है।
पीड़ित अनिल कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया उसकी एसजीएम नगर निवासी योगेश नाम के व्यक्ति से काफी समय से जान-पहचान है। योगेश ने बताया वह कमेटी चलाता है। इसमें हर माह पैसा निवेश किया जाता है। स्कीम के तहत वह बैंक से भी ज्यादा ब्याज देता है। आखिरी में एक मुश्त पैसा उठाने पर काफी मुनाफा होता है। अनिल ने उसकी बातों में आकर मार्च-2018 में 12 लाख रुपये की कमेटी के लिए हर माह पैसे निवेश करने शुरू कर दिए। दो साल बाद कमेटी पूरी होने पर आरोपी पैसे देने में आनाकानी करने लगा। शुरूआत में आरोपी कोरोना महामारी का बहाना बनाता रहा। इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर पीड़ित को टालने लगा। एसआई ने अपने स्तर पर छानबीन की तो पता लगा कि आरोपी योगेश ने कमेटी में निवेश का झांसा देकर कई और लोगों के साथ भी ठगी की है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
-
पुलिस कर्मी होने के बाद भी नहीं ली कोई रसीद
इसे एसआई का आरोपी के प्रति विश्वास कहें या खुद पर अतिरिक्त आत्मविश्वास कि उसने क्राइम ब्रांच का अधिकारी होने के बाद भी पैसे देने के बाद आरोपी से कोई रसीद नहीं ली। आरोपी हर माह नकद पैसे ले जाता था। एसआई ने आरोपी के केवल मौखिक रूप से करार किया और लाखों रुपये दांव पर लगा दिए। ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि जब खुद पुलिस के कर्मचारी ही लालच में आकर ठगी का शिकार हो जाते हैं तो आम लोगों का क्या हाल होगा।
-
केवल विश्वास पर चलता है कमेटी का खेल
कमेटी में पैसे लगाकर ठगी का खेल कोई नया नहीं है। इसे केवल विश्वास के आधार पर ही चलाया जाता है। 12 या उससे ज्यादा लोग आपस मिलकर एक व्यक्ति के पास पैसे जमा कराते हैं। जिस सदस्य को ज्यादा जरूरत होती है वह घाटे से कमेटी उठा लेता है। घाटे के पैसे को अन्य सदस्यों में बांट दिया जाता है। एक के बाद एक सदस्य को पैसा मिलता रहता है। एक का घाटा बाकी का मुनाफा होता है। इससे पैसे एकत्रित हो जाते हैं और किस्तों में पैसे अदा करने के कारण देने वाले पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता। ये पूरा खेल कच्चे का यानी के बिना किसी लिखा पढ़ी के चलता है। जिस सदस्य के पास पैसे एकत्रित होते हैं, वह बेईमान हुआ तो पैसे डूबे समझो।