सांसद प्रवेश वर्मा ने नई आबकारी नीति में शराब की होम डिलीवरी के प्रावधान को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने इसके अलावा आबकारी नीति को विभिन्न मुद्दों पर कई चुनौती याचिका पर भी सुनवाई स्थगित कर दी।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई 20 सितंबर तय की है। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने अन्य मुद्दो पर दायर याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। पीठ ने समय प्रदान करते हुए इन याचिकाओं पर सुनवाई 27 अगस्त तय कर दी।
दिल्ली सरकार की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि नई आबकारी नीति के तहत चल रही महामारी के बीच दिल्ली ने 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त किया है। इस तरह का राजस्व भारत के ज्यादातर राज्यों से अधिक है।
उन्होंने कहा नई आबकारी नीति 2021-22 का उद्देश्य भ्रष्टाचार को कम करना और शराब के व्यापार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रदान करना है और इसके खिलाफ सभी आशंकाएं केवल काल्पनिक हैं। सरकार ने कहा कि इस मुद्दे पर इस पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए जल्द जवाब दाखिल किया जाएगा।
वहीं प्रवेश वर्मा ने चुनौती याचिका में दिल्ली उत्पाद शुल्क (संशोधन) नियमों को चुनौती दी गई है। अधिवक्ता बालाजी श्रीनिवासन के माध्यम से दायर याचिका में उन्होंने कहा कि नई नीति ऐसे समय में पेश की गई थी जब राष्ट्रीय राजधानी अभी भी घातक कोविड की दूसरी लहर और दवाओं और टीकाकरण की भारी कमी से जूझ रही है। उन्होंने कहा नीति में घरेलू और बाल दुर्व्यवहार पर घरों में शराब लाने के दुश्प्रभाव की भी अनदेखी की गई है।
याची ने कहा कि इस नीति से सार्वजनिक स्थानों पर शराब की खपत बढ़ेगी और इस प्रतिबंध को नजरअंदाज किया गया है। इससे अस्पतालों और स्कूलों में शराब की डिलीवरी की संभावना बढ़ गई है। वहीं शराब पहुंचाने वालों की सुरक्षा के लिए किसी भी प्रकार से विचार नहीं किया गया।
याचिका ममें यह भी तर्क दिया झ्गया है कि शराब की होम डिलीवरी संविधान के अनुच्छेद 47 के खिलाफ है जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करना और मादक पेय पदार्थों के सेवन पर रोक लगाने का प्रयास करना राज्य का कर्तव्य बनाता है।