सरकारी स्कूलों की पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत प्रत्येक सत्र में मुफ्त पाठ्यक्रम की किताबें दी जाती हैं। कोरोना संक्रमण के कारण बीते दो वर्षों से शिक्षा विभाग ने किताबें नहीं भेजी हैं। प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी कि अबकी बार सत्र शुरू होने से पहले ही स्कूलों में किताबें भिजवा दी जाएंगी। शैक्षणिक सत्र शुरू हुए एक माह से अधिक हो चुका है, लेकिन न तो किताबें स्कूलों तक पहुंची हैं और न ही प्रदेश सरकार या शिक्षा विभाग किताबों को लेकर कोई जानकारी दे रहा है कि कब तक किताबें उपलब्ध हो पाएंगी। ऐसे में शिक्षकों को मोबाइल पर भी व्हाट्सएप पर पाठ्यक्रम भेेजना पड़ रहा है।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कहा पिछले दो वर्षों से नहीं भेजी किताबें
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ गुरुग्राम के जिला प्रधान दुष्यंत ठाकरान का कहना है कि पिछले दो वर्षों से शिक्षा विभाग ने किताबें नहीं भेजी हैं। पुरानी किताबें फट चुकी या खराब हो चुकी हैं, ऐसे में बच्चों के पास किताबों का आदान-प्रदान करने का विकल्प भी नहीं बचा है। प्रदेश सरकार द्वारा शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही किताबें मिलने की घोषणा की गई थी, जिससे उम्मीद थी, कि स्कूलों में सत्र की शुरुआत से ही अच्छे ढंग से पढ़ाई शुरू होगी। किताबें नहीं मिल पाने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को भेजी जानी हैं किताबें
गुरुग्राम की जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी शशि बाला अहलावत का कहना है कि पाठ्यक्रम की किताबें शिक्षा विभाग की ओर से ही स्कूलों को भेजी जानी है। जिला स्तर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि किताबें कब तक आएंगी। विभाग की ओर से किताबें पहुंचने पर बच्चों को वितरित कराई जाएंगी, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था से ही कक्षाओं में पढ़ाई कराई जा रही है।