रेलवे ने आधुनिक सुविधाओं से लैस तेजस ट्रेन के कोच का निर्माण चुपके से बंद कर दिया है। यानी नई तेजस ट्रेन अब पटरी पर नहीं दौड़ेगी। तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु की इस ड्रीम प्रोजेक्ट ट्रेन को देश में आधुनिकतम का दर्जा दिया गया था। यह देश में निर्मित 200 किलोमीटर प्रतिघंटे रफ्तार वाली स्वचालित दरवाजे से लैस ट्रेन है।
रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि तेजस ट्रेन की मांग नहीं है। जब मांग होगी तो इसका निर्माण किया जाएगा। हालांकि, मंत्रिमंडल में बदलाव के बाद ही इस ट्रेन के निर्माण की गति पर प्रभाव पड़ गया था। दिल्ली-चंडीगढ़ व दिल्ली-लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस का निर्माण शुरू हो गया था।
यह ट्रेन फिलहाल इस रूट के लिए तैयार तो कर ली गई है, लेकिन अब भी हरी झंडी का इंतजार है। इसे निजी हाथों सौंपने की बात है। निजी हाथों मे सौंपने के बाद संभव है कि इसका किराया विमानों की तर्ज पर डायनेमिक किया जाए। निजी कंपनी के हाथ में संचालन पहुंचते ही सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के साथ किराये में बढ़ोत्तरी भी तय है।
उधर, मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि मंत्री बदलने के बाद कई योजनाएं बदल जाती हैं। पिछले दिनों गरीब रथ को भी एक्सप्रेस ट्रेन में बदलने की चर्चा ने जोर पकड़ा था। दबाव के बाद रेल मंत्रालय ने इस फैसले को वापस ले लिया।