बताया गया है कि नई बसें तकनीक के मामले में पुरानी बसों से ज्यादा आधुनिक हैं। पैनिक बटन, हाइड्रोलिक लिफ्ट और सीसीटीवी कैमरों के अलावा इन बसों में 37 यात्री सीटें होंगी।
इसके साथ ही हादसों को रोकने के लिए इन बसों की बैक साइड पर भी एक कैमरा लगा है, जिससे बस चालक को पीछे आने वाले वाहन की स्थिति का पता रहेगा, जिससे वह हर परिस्थिति में अलर्ट रहेगा और हादसों की संभावना कम रहेगी।
इन बसों की पहली खेप को द्वारका सेक्टर-22 डिपो से चलाया जाएगा। ज्ञात हुआ है कि इसके अलावा आने वाली अन्य नई बसें बवाना सेक्टर-1, रानी खेड़ा के तीन डिपो, खडख़ड़ी नाहर और मुंडेला कलां डिपो में आएंगी, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए चलाया जाएगा।
दिल्ली सरकार की योजना के तहत डीटीसी की एक हजार लो फ्लोर एसी बसों के अलावा क्लस्टर स्कीम के तहत एक हजार स्टैंडर्ड फ्लोर सीएनजी बसें व एक हजार लो फ्लोर एसी सीएनजी बसें और एक हजार लो-फ्लोर एसी इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जानी हैं। वर्तमान में दिल्ली में डीटीसी और क्लस्टर बसों को मिलाकर लगभग 5500 बसें दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रही हैं, लेकिन दिल्ली वालों की जरूरत के हिसाब से दिल्ली में 1100 हजार बसें होनी चाहिएं। अगर आने वाले कुछ महीनों में चार हजार बसें खरीद भी ली जाती हैं तो फिर भी दिल्ली में 1500 बसों की कमी बरकरार रहेगी।
एक साल में पांच बार फेल हो चुका है डीटीसी बसों का टेंडर
दिल्ली में डीटीसी की एक हजार बसें आने हैं और बीते शुक्रवार को ही एक हजार बसों के लिए डीटीसी ने टेंडर जारी किया है। अब सवाल यह है कि क्या इस बार डीटीसी बसों के लिए डाला गया टेंडर सफल रहेगा। अगर यह टेंडर सफल हुआ तो दिल्ली वालों के लिए बेहतर है, लेकिन अगर यह टेंडर फिर से कंपनियों के रुझान ना आने की स्थिति में फेल हो गया तो बसों की खरीद फिर से अधर में लटक सकती है।