अदालत में आपराधिक मामला विचाराधीन होने के बावजूद दुबई में दोस्त के विवाह में शामिल होने के लिए एक व्यक्ति सामान सहित एयरपोर्ट पहुंच गया। उसे उस समय मायूसी का सामना करना पड़ा जब अदालत ने उसके विदेश जाने की मंजूरी संबंधी आवेदन खारिज कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने आरोपी को विदेश जाने से रोक संबंधी मजिस्ट्रेट के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि आरोपी का आचरण बहुत कठोर है। उन्होंने कहा एक तरफ उसकी मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका इस अदालत में विचाराधीन है, वहीं उनके वकील ने बताया कि वह पहले ही हवाई अड्डे पर पहुंच गया है।
अदालत ने सरकारी वकील के उस तर्क पर सहमति जताई कि आरोपी ने अदालत को अपनी टिकटों व दुबई में होटल बुकिंग के संबंध में जानकारी को छिपाया है। अदालत ने कहा उनकी नजर में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा आरोपी को विदेश यात्रा की मंजूरी न देने संबंधी फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। ऐसे में वे याचिका खारिज करते हैं।
एक फरवरी को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने धारा 509 और 34 के तहत अपराध का सामना करने वाले ऋषभ जैन की विदेशी यात्रा मांग को खारिज कर दिया था। जैन ने इसे सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी।
जैन ने तर्क रखा था कि दोस्त के विवाह के लिए विदेश जाना है और वह दिल्ली का स्थायी निवासी है। ऐसे में उसके भागने की कोई संभावना नहीं है।
उसने कहा होटल की बुकिंग दोस्त के नाम से की गई, जो उसके साथ यात्रा कर रहा है। इसी कारण बुकिंग विवरण में उसके नाम का उल्लेख नहीं किया है। उनके वकील ने तर्क दिया कि बुकिंग रसीदें वेबसाइट से ऑटो-जेनरेट की गई है और ट्रायल कोर्ट ने उस व्यक्ति से कभी भी हवाई टिकट पेश करने के लिए नहीं कहा था और उसे केवल यात्रा यात्रा कार्यक्रम दाखिल करने के लिए कहा गया था।
सरकारी वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा कि शादी एक दोस्त की थी और करीबी रिश्तेदार की नहीं।