उच्च न्यायालय ने गुरुवार को ओखला औद्योगिक क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए स्थानीय अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। वहीं दिल्ली पुलिस को कार्रवाई के दौरान पर्याप्त बल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने ओखला औद्योगिक क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मुद्दे पर उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गई एक जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।
एसडीएमसी के वकील ने कहा कि क्षेत्र का अन्य अधिकारियों के साथ संयुक्त सर्वेक्षण किया गया है और कई संपत्तियों और क्षेत्रों को अतिक्रमण के रूप में पहचाना गया है और अब यह अतिक्रमण हटाने के लिए एक संयुक्त कार्रवाई की योजना बना रहा है।
पीठ ने उनका तर्क सुनने के बाद कहा हम बिना किसी देरी के और अगले दो सप्ताह के भीतर सकारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश देते हैं। हम पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि एसडीएमसी और डीएसआईआईडीसी को अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त बल उपलब्ध कराया जाए।
अदालत ने 24 मार्च को ओखला औद्योगिक क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए एसडीएमसी और डीएसआईआईडीसी के कृत्य को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और अधिकारियों को वहां अनधिकृत निर्माण को हटाने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) और दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (डीएसआईआईडीसी) को दो प्राधिकरणों में से प्रत्येक के एक वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में नामित करने का निर्देश दिया था और वे अनधिकृत निर्माण को हटाने की योजना तैयार करने के लिए मिलेंगे।
वर्तमान कार्यवाही तब शुरू हुई जब उच्च न्यायालय की जनहित याचिका समिति ने सिफारिश की थी कि एक व्यक्ति द्वारा 7 जुलाई, 2017 के पत्र को एक जनहित याचिका के रूप में माना जाए जिसमें उसने औद्योगिक क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के बारे में शिकायत की है।
पत्र में यह आरोप लगाया गया था कि न्यायिक आदेशों के बावजूद अधिकारियों द्वारा अवैध निर्माण को नहीं हटाया गया था और क्षेत्र के स्थानीय लोगों को सार्वजनिक भूमि और सड़कों पर अवैध रूप से कब्जा करने के कारण मुद्दों का सामना करना पड़ रहा था। मामले की अगली सुनवाई 31 मई को होगी।