लगभग डेढ़ साल बाद बुधवार को दिल्ली के स्कूल खुले। सुबह से ही पूरी दिल्ली में तेज बारिश हो रही थी, लेकिन यह बारिश भी बच्चों को स्कूल पहुंचने से नहीं रोक सकी। काफी संख्या में बच्चे अपने-अपने स्कूलों को पहुंचे और पठन-पाठन किया। स्कूल का ज्यादातर समय तो छात्रों को नए माहौल के अनुसार अपने आपको ढालने में ही लगाया। लेकिन स्कूलों के खुलने की खुशी बच्चों के चेहरों से झलक रही थी।
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर विशेषज्ञों ने आशंकाएं जाहिर की हैं, लेकिन संक्रमण के मामले कम होते देख स्कूलों को खोलने का निर्णय किया गया है। इस दौरान भी छात्रों की संख्या आधी रखने, शिक्षण के दौरान शारीरिक दूरी बनाए रखने और अन्य कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी सख्ती से पालन किया जाएगा।
शिक्षामंत्री ने कहा
दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इतने खराब मौसम के बाद भी बच्चे स्कूल आए हैं, इसी से यह बात साबित होती है कि बच्चे स्कूलों को खुलने को लेकर कितना इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल के अंतराल में बच्चों का भारी नुकसान हुआ है। अब छात्र, अध्यापक और अभिभावक तीनों मिलकर इस कमी को पूरा करने की कोशिश करेंगे।
सिसोदिया ने कहा कि उन्होंने स्कूलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी सख्ती के साथ पालन किया जाए। इस दौरान मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने और समय-समय पर सैनिटाइजर के इस्तेमाल की आवश्यकता है। स्कूल अभी ब्लेंडेड मोड में ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन माध्यम से जारी रहेगी। जो भी छात्र स्कूल नहीं आना चाहेगा, उसे बाध्य नहीं किया जाएगा।
अगर स्कूल खोलने के बाद कोई परेशानी सामने नहीं आती है तो अन्य वर्गों के छात्रों को भी स्कूल बुलाया जाएगा। इसके लिए कुछ स्कूलों को आधी क्षमता के साथ खोलने पर विचार किया जा सकता है। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक खुशहाली के माध्यम से भी मजबूत किया जाएगा।