दिल्ली की एक अदालत ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि नाबालिग बच्चे की परवरिश के लिए मां अपने पति की पैतृक संपति बेच सकती है। लेकिन महिला को बेची गई संपत्ति से मिली रकम का पूरा हिसाब देना होगा। साथ ही रकम को किसी राष्ट्रीकृत बैंक में एफडी (फिक्स्ड डिपोजिट) करना होगा।
द्वारका स्थित अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सचिन जैन की अदालत ने कहा कि मिली रकम से मां अगर वैकल्पिक रिहायशी या व्यावसायिक जगह खरीदती है तो इसकी जानकारी अदालत को देनी होगी। बच्चे के बालिग होने तक पैतृक संपति से प्राप्त राशि खर्च का हिसाब भी देना होगा। महिला ने कहा कि उसका बच्चा 12 साल का है। 2003 में उसके पिता की मौत हो गई थी। बच्चे की परवरिश के लिए पैतृक संपति के अलावा कमाई का कोई और जरिया नहीं है।