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Delhi:  पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले में निर्णय सुरक्षित, 18 अक्तूबर को अदालत सुनाएगी फैसला

Fri, 13 Oct 2023 03:20 PM IST
आकाश दुबे एएनआई, दिल्ली

सार

अदालत 18 अक्तूबर को फैसला सुनाएगी। सौम्या विश्वनाथ हत्या मामले में 30 सितंबर 2008 को वसंत कुंज थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अदालत ने शुक्रवार को 2008 में टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले में अपना फैसला 18 अक्तूबर के लिए सुरक्षित रख लिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार पांडे ने फैसला सुनाते समय सभी आरोपियों को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया। अदालत ने 6 अक्तूबर को कहा था कि बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी हो चुकी हैं, और मामले को अतिरिक्त दलीलों या स्पष्टीकरण के लिए आज के लिए टाल दिया था।

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दो लोगों को पहले ही किया जा चुका है गिरफ्तार
मलिक और दो अन्य रवि कपूर और अमित शुक्ला को पहले 2009 में आईटी कार्यकारी जिगिशा घोष की हत्या में दोषी ठहराया गया था। पुलिस ने कहा कि जिगिशा घोष की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी से विश्वनाथन की हत्या का मामला सुलझ गया था।

सौम्या विश्वनाथन की घर लौटते वक्त की थी हत्या
सौम्या विश्वनाथन की 30 सितंबर, 2008 को सुबह लगभग 3:30 बजे अपनी कार में काम से घर लौटते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि उसकी हत्या के पीछे डकैती का मकसद था। पांच लोगों- रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक, अजय कुमार और अजय सेठी को उसकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और मार्च 2009 से हिरासत में हैं। 
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जिगिशा घोष की हत्या के मामले में पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाया था। मलिक और दो अन्य  रवि कपूर और अमित शुक्ला को पहले 2009 में आईटी कार्यकारी जिगिशा घोष की हत्या में दोषी ठहराया गया था।

पुलिस ने कहा कि जिगिशा घोष की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी से विश्वनाथन की हत्या के मामले का खुलासा हुआ। ट्रायल कोर्ट ने 2017 में जिगिशा घोष हत्या मामले में कपूर और शुक्ला को मौत की सजा और मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालाँकि, अगले वर्ष, उच्च न्यायालय ने कपूर और शुक्ला की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था और जिगिशा हत्या मामले में मलिक की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।

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