अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर लाए गए सबूत आरोपी को अपराध करने से जोड़ने के लिए अपर्याप्त थे और अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान करने में विफल रहा, जिसने पुलिस को झूठी कॉल की थी।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हत्या की साजिश की झूठी सूचना देने वाले आरोपी को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। 18 साल पहले एसटीडी बूथ से कॉल कर आरोपी ने पुलिस को सूचना दी थी कि एक व्यक्ति के आतंकवादियों के साथ संबंध थे और वह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मारने की साजिश में शामिल था।
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कड़कड़डूमा अदालत ने आरोपी की पहचान स्थापित नहीं होने और पर्याप्त साक्ष्य के आभाव को देखते हुए उसे बरी कर दिया। करीब 18 साल पहले एसटीडी बूथ से पुलिस को की गई झूठी कॉल की शिकायत पर जुलाई 2005 में न्यू उस्मान पुर थाने में मामला दर्ज किया गया। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विपुल संदवार ने आरोपी महेश को संदेह का लाभ देते हुए और आरोपी को कथित अपराध से जोड़ने वाले सबूत नहीं मिलने पर बरी कर दिया।
न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि आरोपी महेश ने आईपीसी की धारा 182/507 के तहत अपराध का दोषी नहीं पाया गया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अभियुक्त की पहचान उस व्यक्ति के रूप में स्थापित करने में विफल रहा है, जिसने पुलिस को झूठी कॉल की थी। अभियोजन पक्ष ने अपने एकमात्र गवाह बूथ मालिक ललित आनंद पर बहुत अधिक भरोसा किया जिसके बयान स्पष्ट नहीं हैं। अदालत ने 13 अप्रैल के फैसले में कहा कि उसकी जिरह में कहा गया है कि संबंधित कॉल के समय वह अपनी दुकान में मौजूद नहीं था। प्राथमिकी 20 जुलाई, 2005 को दर्ज एफआईआर में उल्लेख किया गया था कि सचिन टेलीकॉम का मालिक राकेश कुमार के आतंकवादियों से संबंध थे। उसपर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप लगे थे।