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Delhi: प्राइवेट कंपनी से बिजली सब्सिडी को ऑडिट कराने पर हंगामा, भाजपा का भ्रष्टाचार छुपाने का आरोप

Wed, 19 Apr 2023 07:52 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि दिल्ली सरकार के द्वारा पावर डिस्कॉम को दी गई पावर सब्सिडी का निजी कंपनी से ऑडिट कराने का फैसला बहुत बड़ा छलावा है। उन्होंने कहा कि अब तक केजरीवाल सरकार बिना किसी ऑडिट मैकेनिज्म के पावर डिस्कॉम्स को बिजली सब्सिडी के पैसे देती रही है...
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Atishi Marlena and Virendra Sachdeva - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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शराब घोटाले में बुरी तरह उलझी दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी के मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अरविंद केजरीवाल सरकार ने एक निजी कंपनी के जरिए दिल्ली की बिजली कंपनियों का ऑडिट कराने का फैसला लिया है। लेकिन भाजपा ने आरोप लगाया है कि यह भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश है क्योंकि इस ऑडिट फर्म को सरकार के जरिए ही भुगतान किया जाएगा, इसलिए इस मामले का सच बाहर नहीं आएगा। पार्टी ने बिजली सब्सिडी का मामला सीएजी से कराने की मांग की है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि दिल्ली सरकार के द्वारा पावर डिस्कॉम को दी गई पावर सब्सिडी का निजी कंपनी से ऑडिट कराने का फैसला बहुत बड़ा छलावा है। उन्होंने कहा कि अब तक केजरीवाल सरकार बिना किसी ऑडिट मैकेनिज्म के पावर डिस्कॉम्स को बिजली सब्सिडी के पैसे देती रही है। इस पॉवर डिस्कॉम में दिल्ली सरकार और निजी कंपनियां बराबर की भागीदार हैं।

भाजपा नेता का आरोप है कि डिस्कॉम बोर्ड में आम आदमी पार्टी नेताओं की नियुक्ति की जाती रही है। ऐसे में यह माना जा सकता है कि सब्सिडी के रूप में किया गया भुगतान दूसरे रूट से आम आदमी पार्टी के पास वापस आ जाता है। भाजपा ने शराब घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि उसी मॉडल के सहारे बिजली सब्सिडी की रकम को भी भ्रष्ट रास्तों से पार्टी तक पहुंचाया गया है। सचदेवा ने कहा कि ऑडिटरों को पावर डिस्कॉम या दिल्ली सरकार के खजाने से भुगतान होगा, तो फिर सही रिपोर्ट की उम्मीद कैसे रखी जाये। निजी कंपनी के जरिए ऑडिट कराने के दिल्ली सरकार के निर्णय को अनुमति देने के बाद भी कथित तौर पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना इससे सहमत नहीं बताए जाते हैं।

महत्त्वपूर्ण बात है कि इसी मामले में सात साल पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि बिजली कंपनियों का ऑडिट नहीं हो सकता। इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया था। लेकिन इस मामले पर अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। भाजपा नेता रामवीर बिधूड़ी ने कहा कि बिजली कंपनियों का ऑडिट कराने के लिए बिजली अधिनियम 2003 की धारा-108 लागू की जानी चाहिए थी। इससे ऑडिट कराना अनिवार्य हो जाता। लेकिन सरकार ने आज तक उस धारा को लागू नहीं किया।

उन्होंने कहा कि 2003 में जब बिजली का निजीकरण हुआ था, दिल्ली में बिजली की चोरी 60 फीसदी से ज्यादा होती थी। अब यह दर घटकर 7-8 फीसदी ही रह गई है। इस प्रकार बिजली चोरी रुकने का लाभ जनता तक पहुंचाया जाना चाहिए था। लेकिन इस समय घरेलू बिजली की कीमत 8.50 रुपये प्रति यूनिट तक और कमर्शियल रेट 18 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि यदि बिजली चोरी रोकने वाला लाभ जनता तक पहुंचता, तो दिल्ली में बिजली बहुत सस्ती हो जाती।

दिल्ली सरकार ने रिलायंस की बिजली कंपनियों बीआरपीएल और बीवाईपीएल से 21250 करोड़ रुपये लेने थे, लेकिन आरोप है कि सरकार ने 11,550 करोड़ रुपये में ही सेटलमेंट कर लिया। बिधूड़ी ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियों को एलपीएस (लेट पेमेंट सरचार्ज) के रूप में जनता से 18 फीसदी लेने की अनुमति दी गई, लेकिन सरकार ने इन बिजली कंपनियों से बकाया पर लेट पेमेंट सरचार्ज 12 फीसदी ही लेने का निर्णय किया।

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