महिलाएं अक्सर करती हैं नजरअंदाज
डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर ओपीडी में आने वाली महिलाओं से बातचीत के बाद पता चलता है कि अधिकतर महिलाएं परेशानी होने के बाद भी इसे नजरअंदाज करती हैं। यदि महिलाएं समय पर समस्या की पहचान कर इलाज शुरू कर देती हैं तो पूरा इलाज हो सकता है।
ऐसे करता है वायरस असर
सर्वाइकल कैंसर होने के लिए 99.9 फीसदी एचपीवी वायरस जिम्मेदार है। इसके इंफेक्शन से ही समस्या बढ़ती है। हालांकि, 80 फीसदी मामलों में महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण यह अपने आप ही ठीक हो जाती है, लेकिन 20 फीसदी मामलों में यह वायरस सोए हुए अवस्था में महिला के निजी अंग में रहता है। जब महिला की इम्यूनिटी कमजोर होती है। एनीमिया बढ़ता है और पोषण घटता है तो वायरस सक्रिय होकर इंफेक्शन बढ़ाता है जो आगे चलकर 5 से 20 सालों में कैंसर बना देता है।
अभी मौजूद जांच
- 22 से अधिक उम्र की महिला का पैप टेस्ट, हर 3 साल में एक बार
- 30 साल से अधिक उम्र की महिला का एचपीवी टेस्ट, हर पांच साल में एक बार
कब हों सचेत
- निजी अंग से सफेद पानी का निकलना
- शारीरिक संबंध बनाने पर निजी अंग से खून का रिसाव
- सर्वाइकल कैंसर बढ़ने पर दिक्कत : पेट व कमर में दर्द
- महिलाओं में यह कैंसर सामान्य : स्तन, ग्रीवा, ओवरी, यूट्रस