सुंदर दिखने की होड़ में सेहत पर असर
बाजार में कई सारे सौंदर्य प्रसाधन हैं, जिनका इस्तेमाल सुंदर और गोरा दिखने के लिए करते हैं। कुछ वस्तुएं त्वचा को खराब कर सकती हैं, क्योंकि उनमें हानिकारक केमिकल होते हैं। सुंदर दिखने की यह अंधी दौड़ स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि त्वचा चमकाने वाले इन उत्पादों में मौजूद पारे से शरीर में मेलेनिन का उत्पादन रुक जाता है। बता दें कि मेलेनिन शरीर में बनने वाला एक प्राकृतिक पिग्मेंट है, जिसकी वजह से त्वचा, बालों और आंखों का रंग निर्धारित होता है। यह मेलेनिन हर तरह की त्वचा में पाया जाता है। यह न केवल शरीर की त्वचा के रंग को निर्धारित करता है साथ ही सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणों से भी हमारे शरीर की रक्षा करता है।
सांस संबंधी हो सकती है परेशानी
पारा एक ऐसा केमिकल एलिमेंट है, जो त्वचा में मेलेनिन की मात्रा को कम करने में सक्षम है। इसके बहुत से दुष्प्रभाव भी हैं, जैसे कि इसके इस्तेमाल से चकत्ते पड़ सकते हैं। साथ ही, त्वचा का रंग खराब हो सकता है और उस पर दाग हो सकते हैं। इसके अलावा, यह त्वचा जरिए सांस के माध्यम से या मौखिक रूप से अवशोषण क्रिया को प्रभावित करके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।
सरकार ने बनाए हैं नियम
देश में सौंदर्य प्रसाधनों में मर्करी मिलाए जाने को रोकने के लिए औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम 2020 के तहत सख्त नियम है। मर्करी कंपाउंड वाले सौंदर्य प्रसाधनों का निर्माण और आयात पूरी तरह से प्रतिबंधित है। लेकिन, गैर-इरादतन एक पीपीएम तक मर्करी की अनुमति है। भारत ने पारे के इस्तेमाल और उसके नियंत्रण को लेकर मिनामाटा कन्वेंशन को भी मंजूरी दे दी है, जिसमें सौंदर्य प्रसाधनों में पारे के इस्तेमाल को एक पीपीएम तक सीमित करने का प्रावधान है।
पारा युक्त उत्पादों के लंबे समय तक सेवन से स्वास्थ्य खराब हो सकता है। अधिकारियों के लिए यह आवश्यक है कि वे त्वचा का रंग साफ करने वाली पारा युक्त आयातित क्रीम की नियमित तौर पर निगरानी करें। देश में उच्च स्तर के पारा युक्त त्वचा को गोरा करने वाली जहरीली क्रीम के आयात को रोकने के लिए एक प्रभावी निगरानी प्रणाली स्थापित करे। -सतीश सिन्हा, एसोसिएट निदेशक, टॉक्सिक्स लिंक