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शोधार्थियों को तोहफा: शिक्षण संस्थानों का पेटेंट शुल्क 80 फीसदी घटाया, सरकार ने जारी की अधिसूचना

Fri, 24 Sep 2021 09:10 AM IST
पूजा त्रिपाठी सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, आम लोगों की दिक्कत पर आधारित शोध पर विशेष पर शोध और तकनीक बनाने पर काम हो रहा है। पेटेंट आवेदकों की दिक्कतों के समाधान के लिए 2016, 2017, 2019, 2020 में पेटेंट नियमों में संशोधन हुआ है।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
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विस्तार
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सरकार ने शोध को बढ़ावा देने के मकसद से शिक्षण संस्थानों का पेटेंट शुल्क 80 फीसदी तक घटा दिया है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत ज्ञान अर्थव्यवस्था में नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए पेटेंट फाइलिंग में यह राहत दी गई है। सरकार ने पेटेंट संशोधित नियम 2021 की अधिसूचना भी जारी कर दी है। यह 21 सितंबर से लागू माना जाएगा।

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शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी, विश्वविद्यालय, आईआईएससी समेत अन्य शिक्षण संस्थानों में प्रोफेसर, शिक्षक और छात्र कई ऐसी नई प्रौद्योगिकी विकसित करते हैं। उन्हें व्यावसायीकरण  की सुविधा के लिए पेटेंट कराने की जरूरत होती है। नवोन्मेषकों को इन पेटेंटों को उन संस्थानों के नाम पर लागू करवाना पड़ता है। जिन्हें बड़े आवेदकों के लिए उस शुल्क का भुगतान करना पड़ता है। पेटेंट के लिए महिला समेत आठ नई श्रेणियां भी ईजाद की गई हैं।

2016 से पेटेंट में तेजी:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं और संस्थानों से हमेशा रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप पर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं। देश में 2016 के बाद पेटेंट में तेजी आई है। क्योंकि इसी दौरान रिसर्च कार्यों को बढ़ावा देने के लिए सरकार आर्थिक मदद दे रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, आम लोगों की दिक्कत पर आधारित शोध पर विशेष पर शोध और तकनीक बनाने पर काम हो रहा है। पेटेंट आवेदकों की दिक्कतों के समाधान के लिए 2016, 2017, 2019, 2020 में पेटेंट नियमों में संशोधन हुआ है।
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अब पेटेंट करना आसान:
कोई भी नवोन्मेषक अब ऑनलाइन पटेंट के लिए आवेदन कर सकता है। सुविधा के लिए नए परीक्षकों की भर्ती, वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेटेंट के मामलों की सुनवाई, वेबसाइट का दोबारा डिजाइन व हितधारकों तक समय से आईपी सूचनाएं पहुंचाना,स्टार्टअप के आवेदन के लिए स्टार्टअप बौद्धिक संपदा संरक्षण (एसआईपीपी)की सुविधा शुरू की गई है। इसके अलावा सरकार का अलग विभाग किसी भी प्रकार की शिकायत, फीडबैक, सुझाव भी लेता है, ताकि देरी पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा सके।

पेटेंट जांच का समय 72 महीने से घटकर अधिकतर 30 महीने हुआ:
पहले पेटेंट दायर करने के बाद जांच समेत अन्य औपचारिकताओं के लिए 72 महीने का समय निर्धारित होता था। लेकिन मोदी सरकार ने नियमों में बदलाव करके इसकी समय-सीमा 12 से 30 महीने तय कर दी है। सरकार की योजना है कि 2021 के अंत तक इस समय-सीमा को ओर कम किया जाए। इसके अलावा अब पेटेंट दायर होने के एक साल के अंदर पेटेंट अनुदान के लिए फैसला होगा।

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