कश्मीर घाटी के हालात सुधरने के बाद स्थानीय निवासियों में उम्मीद बंधी है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में पहुंचे कारोबारियों का मानना है कि शांति कायम होने से कारोबार पटरी पर है। सरकार भी इसमें मददगार बनी है।
स्थानीय कारीगरों और कलाकारों के लिए घाटी में विशेष 10 क्लस्टर और 5000 सोसायटियां बनाई गई हैं। इसमें युवाओं को डिजाइनिंग, डाइंग और बुनकारी की ट्रेनिंग और वरिष्ठ कलाकारों को ट्रेनर के तौर पर रोजगार मिल रहा। ट्रेड फेयर में फोकस स्टेट जम्मू कश्मीर के पवेलियन में राज्य के प्रदर्शकों, शिल्पकारों और बुनकरों की जुबानी पिछले चार साल में इनके बदलाव की हकीकत को सुना व समझा जा सकता है। जम्मू कश्मीर पवेलियन में हस्तशिल्प, हथकरघा, कृषि उत्पादों के 120 स्टाल हैं, 10 नेशनल व स्टेट अवार्डी कलाकार अपने काम का लाइव प्रदर्शन कर रहे।
बारामुला जिले से सिंकपुरा गांव के रहने वाले स्टेट अवार्डी मो शफी भट कानी शॉल बना रहे। दो दिन में यहीं इन्होंने जम्मू कश्मीर ट्रेड प्रमोशन का लोगो बनाया। अब इंडिया गेट का लोगो बनाने की तैयारी में हैं। अखरोट की लकड़ी की कानी और अपनी उंगलियों के इस्तेमाल से ये पशमीना, सूत, रेशम के कपड़े पर कारीगरी करते हैं। शॉल, मफलर, साड़ी और विभिन्न प्रकार के लोगो बनाने में माहिर हैं।
इनके काम को यहां इनसे सीखा जा सकता है। कानी शॉल, शोजनी शॉल, सूट, कश्मीरी फेरन, टोपी, मफलर, पेपर मशी, तिला वर्क, जूलरी, ड्राई फ्रूट, कहवा और शहद खरीद सकते हैं। युवा कामगारों ने ये उत्पाद तैयार किए हैं, जिनमें 70 फीसदी महिला कामगार शामिल हैं।