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चुनावी मौसम में राहुल-मोदी भी हुए 'मेड इन चाइना'

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चुनाव प्रचार में चीनी माल धड़ाधड़ बिक रहा है। पहली बार विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने चीनी प्रचार सामग्री को अपनी लिस्ट में शामिल किया है। दुकानदार अनिल गुप्ता के मुताबिक, उन्होंने ऑर्डर मिलने पर बीजेपी और कांग्रेस के लिए चीनी प्रचार सामग्री मंगवाई गई है।
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आईपीएल की तर्ज पर चुनावी चेयर बैट की सबसे अधिक डिमांड हैं, जिसमें कांग्रेस का हाथ तो बीजेपी के बैट में मोदी का फोटो लगा है। इसकी कीमत प्रति बैट 30 रुपये है। मोदी के फोटो वाला परफ्यूम कार कार्ड 20 रुपये का है।

मोबाइल स्टिकर भी पहली बार आए हैं, जिसकी प्रति 11 स्टीकर कीमत छह रुपये है। बीजेपी वाले स्टिकर में मोदी का फोटो और कांग्रेस वाले में हाथ का निशान है।

थ्रीडी से सोशल मीडिया को मिलेगी टक्कर

मोदी के थ्रीडी फॉर्मूले को लोकसभा चुनावों में प्रचार के तौर पर पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है। थ्रीडी प्रचार सामग्री में मोदी के विजिटिंग कार्ड के एक तरफ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और राजनाथ सिंह के फोटो के नीचे मोदी का फोटो व कमल बना हुआ है। जबकि पीछे की ओर कैलेंडर बना है। यह ढाई रुपये का है। इसी तरह गर्मी से ठंडक का अहसास करने वाला हाथ से हवा करने वाला पंखा खास है।

इसके अलावा गर्मी से बचाने के लिए चीनी छतरी भी खास है, जोकि अस्सी रुपये की है। थ्रीडी चुनाव सामग्री का इस्तेमाल अभी तक बीजेपी ही कर रही है। हालांकि कांग्रेस ने भी ऑर्डर दे दिया है। अब तक चुनावों में विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अपने चिह्नों को प्रचार सामग्री में इस्तेमाल करती रही हैं। पहली बार पार्टियों के चिह्न से पहले चेहरे हिट हो रहे हैं। ऑल इंडिया इलेक्शन ट्रेडर्स एंड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के महासचिव गुलशन खुराना के मुताबिक, इस बार के लोकसभा चुनाव खास हैं।

कॉटन व नॉयलॉन की टी शर्ट में अरविंद बनाम मोदी बनाम राहुल छाए हुए हैं। अच्छा यह है कि इस बार प्रचार सामग्री प्लास्टिक की जगह कागज पर उपलब्ध है।

मायावती का पिन-क्लिप, मोदी की की-रिंग

वहीं महिला उम्मीदवार और कार्यकर्ताओं को ध्यान में रखकर बसपा प्रमुख मायावती ने इसकी शुरुआत की है। मायावती ने पार्टी को दर्शाते हाथी वाले हेयर पिन, क्लिप, बैंगल, रिंग, माला और कैप, छतरी आदि उतारी हैं।

हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर सीट से अनुराग ठाकुर के प्रचार के लिए सामग्री लेने पहुंचे आयुष गर्ग के मुताबिक, प्रचार सामग्री में मोदी हिट हैं। उसमें भी की-रिंग सबसे अधिक बिक रहा है। उनके बाजार में आडवाणी और मोदी दोनों के फोटो वाली सामग्री है, लेकिन कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी को ही तवज्जो दे रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के धरोरा से जुल्फिकार अली चुनाव प्रचार सामग्री का ऑर्डर देने पहुंचे थे। कहते हैं कि बेशक सोशल मीडिया और वेबसाइट ने प्रचार के रंग बदल दिए हों, लेकिन परंपरागत सामग्री के बगैर प्रचार हो ही नहीं सकता। उन्होंने ‘आप’ की टोपी, पेन, बिल्ला, चाबी का छल्ला, मफलर, पेपर लड़ी व झंडे आदि के सैंपल लेते हुए ऑर्डर बुक करवाया। वे मानते हैं कि सदर बाजार में सामग्री सस्ती और अच्छी मिलती है।
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भारत में कहां बनती हैं ये चीजें?

ऑल इंडिया इलेक्शन ट्रेडर्स एंड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के महासचिव गुलशन खुराना ने बताया कि राजधानी के सीलमपुर, शाहदरा, मुंडका, नांगलोई आदि इलाकों की छोटी स्लम कॉलोनियों में हजारों परिवार इसी व्यवसाय में लगे हैं।

ऑल इंडिया इलेक्शन ट्रेडर्स एंड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल गुप्ता बताते हैं कि सोशल मीडिया और वेबसाइट के चलते चुनाव प्रचार सामग्री के व्यापार में गिरावट आई है।

विधानसभा चुनावों में तो व्यापार बिल्कुल मंदा रहा, लेकिन लोकसभा चुनावों के चलते हालत सुधरी है। देशभर से विभिन्न पार्टियों के उम्मीदवारों के ऑर्डर आ रहे हैं। हालांकि पिछले चुनावों की तुलना में व्यापार में पचास फीसदी की गिरावट आई है।
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