लोकसभा प्रत्याशियों के खिलाफ प्रदेश भाजपा कार्यकर्ताओं में विरोध का सुर उठने लगा है। मंगलवार को पूरे दिन सबसे ज्यादा विरोध गाजियाबाद सीट पर उम्मीदवार की घोषणा को लेकर होता रहा। स्थानीय कार्यकार्ताओं को कोई भी पैराशूट कंडीडेट मंजूर नहीं है, लेकिन पार्टी ने यहां से पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह को टिकट दे दिया।
इससे नाराज कार्यकर्ताओं ने न केवल पार्टी कार्यालय पर नारेबाजी की बल्कि सिर मुंडवाकर वीके सिंह का विरोध किया। बाहरी बनाम स्थानीय के मुद्दे पर गाजियाबाद से के प्रत्याशी जरनल वीके सिंह का विरोध चरम पर है। गाजियाबाद में हर-हर मोदी, घर-घर मोदी के साथ वीके सिंह हाय-हाय, वीके सिंह वापस जाओ के नारे लगाए जा रहे हैं।
यहीं नहीं सोमवार शाम जब वीके सिंह पार्टी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे तो समर्थकों की भारी भीड़ उनके खिलाफ नारेबाजी कर दी। इस बीच विरोधी समर्थकों और समर्थकों के बीच करीब आधे घंटे तक आमने-सामने वीके सिंह जिंदाबाद, वीके सिंह हाय-हाय के नारे लगते रहे। मामला उग्र होने पर समर्थकों ने विरोधियों संग धक्का-मुक्की शुरू कर दी थी।
यहां दलित कार्ड खेलने के चक्कर में फंस गई बीजेपी
उत्तर पश्चिम दिल्ली सीट पर दलित कार्ड खेलते हुए बीजेपी ने हाल ही में बीजेपी का हाथ थामने वाले दलित नेता उदित राज को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन प्रवासी उम्मीदवार को टिकट देने पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ही उनका विरोध शुरू कर दिया है।
भाजपा मुख्यालय में टिकट बंटवारे को लेकर अपने कार्यकर्ताओं ने ही मंगलवार को विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हाल ही में पार्टी में शामिल डॉ. उदित राज को टिकट देना जायज नहीं है। कार्यकर्ता जमीन तैयार करते हैं, लेकिन जब टिकट देने की बात होती है तो पैराशूट से उम्मीदवार उतार दिया जाता है।
अब सवाल ये है कि जिस उम्मीदावार का पार्टी कार्यकर्ता ही विरोध कर रहे हैं। उसे जनता किस आधार पर वोट देगी। साथ ही पार्टी की छवि पर इस तरह के विरोध प्रदर्शनों पर किस तरह का असर पड़ेगा।
इन पर लगा दबंग होने का आरोप
दक्षिणी दिल्ली के प्रत्याशी के ‘दबंगई’ के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। दक्षिणी दिल्ली लोकसभा के भाजपा प्रत्याशी रमेश बिधूड़ी के खिलाफ भी विरोध शुरू हो गया है।
मंगलवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। दक्षिण क्षेत्र से पहुंचे कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन से मिलकर प्रत्याशी बदलने की मांग की। पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि बिधूड़ी दबंगई दिखाते हैं। पार्टी के कार्यकर्ताओं से तालमेल ठीक नहीं रखते। ऐसे में जनप्रतिनिधि बनाना उन्हें जायज नहीं है।
कुछ ऐसी हालत अन्य सीटों पर भी है। प्रत्याशी सम्मेलन तो आयोजित कर रहे हैं, लेकिन उनके कार्यकर्ता सम्मेलन में उस लोकसभा के विधायक और पार्षद नहीं शामिल हो रहे हैं। होली को लेकर भी कई सम्मेलन हुए, लेकिन ज्यादातर भाजपा नेता शामिल नहीं हुए।