तीन जांच रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
अभी फिलहाल खाद्य पदार्थों की जांच की रिपोर्ट और मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। इन दोनों रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई होगी। मामले की जांच और जिम्मेदारों की लापरवाही की जानकारी का पता प्रमुख रूप से तीन जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
पानी के सैंपल की रिपोर्ट फीट
फिलहाल, पानी के सैंपल की रिपोर्ट मिल चुकी है। उसमें गड़बड़ी नहीं है। अब खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। दोनों रिपोर्ट मंगलवार को मिलने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि नियम के अनुसार आशा किरण होम में जब भी किसी की मौत होती है तब पोस्टमार्टम कराया जाता है। अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी आती है तो एसडीएम पुलिस को जांच करने के लिए कहते हैं।
इसके साथ ही यदि खाद्य पदार्थों में कोई गड़बड़ी होती है तो उसके लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है। उल्लेखनीय है कि जुलाई माह में आशा किरण होम में रहने वाले 14 लोगों की मौत इलाज के दौरान रोहिणी के बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल में हुई थी, वहीं शवों का पोस्टमार्टम हुआ था। मरने वाले 14 लोगों में एक किशोर, आठ महिलाएं और पांच पुरुष थे।
कई मरीजों के स्वास्थ्य में हुआ सुधार
अधिकारियों ने बताया कि आशा किरण होम में रहने वाले कई लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। हालांकि अभी भी कई लोग बीमार हैं उनका उपचार चल रहा है। दूसरी तरफ आशा किरण होम में मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी ने टेंडर निकाला है। इसमें इमारत में खराब छोटी-मोटी चीजों की मरम्मत की जाएगी।
900 लोगों के लिए मात्र छह डॉक्टर
मौजूदा समय में आशा किरण होम में 400 लोगों की रहने की जगह है, लेकिन 900 से अधिक लोगों को रखा गया है। यहां पर रहने वाले अधिकतर लोग मानसिक रूप से कमजोर और शारीरिक रूप से दिव्यांग होते हैं। ऐसे में 24 घंटे देखभाल की जरूरत रहती है, लेकिन यहां सिर्फ 6 डॉक्टर हैं। वहीं, अनुबंध के आधार 14 नर्सिंग आफिसर तैनात हैं। ऐसे में 900 लोगों की देखभाल करने के लिए पर्याप्त संख्या में डाॅक्टर और नर्सिंग स्टाफ की कमी है।
आशा किरण शेल्टर होम की इनसाइड कहानी
रोहिणी स्थिति आशा किरण मंदबुद्धि विकास केंद्र में बीते एक महीने में 14 लोगों की मौत हो गई। इनको न्यूरो से जुड़ी बीमारियों के साथ टीबी, मिरगी, हेपटाइटिस बी व दूसरे गंभीर रोग थे। महीने भर के भीतर इतनी मौतें की सूचना मिलने पर हड़कंप मच गया। आनन-फानन में दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए।
वहीं, उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव को सात दिनों अंदर विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करने को कहा। साथ ही एलजी ने तीन सप्ताह में सभी विभागों से श्वेत पत्र तैयार करने का कहा। उधर, अधिकारियों का कहना है कि उपचार के दौरान 14 लोगों की मौत अलग-अलग दिनों में हुई। इसकी असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही सामने आ सकेगी।