अब जनता तय करे, केजरीवाल ईमानदार या गुनहगार?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इन लोगों ने उनके और मनीष सिसोदिया पर आरोप लगाए हैं। इस देश का सबसे कठोर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत तरह-तरह के आरोप लगाए। अमूमन इसमें जमानत नहीं मिल पाती। इसके बाद भी कोर्ट से जमानत मिल गई। कोर्ट ने इसमें जितना कर दिया, इससे ज्यादा वह कुछ और नहीं कर सकता था। वकील बताते हैं कि यह केस कम से कम 10 साल चलेगा।
केजरीवाल के मुताबिक, आज वह जनता की अदालत में हैं। जनता से पूछना है कि वह केजरीवाल को ईमानदार मानते हैं या गुनाहगार।
ईमानदार हूं तो वोट देना- अरविंद केजरीवाल
केजरीवाल ने एलान किया कि दो दिन बाद वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद तब तक सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे, जब तक जनता अपना फैसला न सुना दे। इस बीच वह गली-गली, घर-घर जाएंगे। केजरीवाल ने अपील कि कि अगर केजरीवाल ईमानदार हैं तो उनके पक्ष में वोट दे देना। अगर आपको लगता है कि केजरीवाल गुनहगार हैं तो वोट मत देना। दिल्ली की जनता का एक-एक वोट ईमानदारी का सर्टिफिकेट होगा।
हर अग्नि परीक्षा देने के लिए तैयार
केजरीवाल के मुताबिक, सत्ता से पैसा और पैसे से सत्ता का खेल खेलने के लिए राजनीति नहीं करनी है। वह हर अग्नि परीक्षा देने के लिए तैयार हैं। केजरीवाल ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट की शर्तें वह देख लेंगे। पहले भी केंद्र सरकार और उपराज्यपाल ने काम रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। लेकिन जिंदगी में जो ईमानदारी कमाई है, वह मायने रखता है।
उनकी एक चिट्ठी एलजी तक नहीं पहुंच पाई
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जेल में कई राजनीतिक, स्वतंत्रता आंदोलन, गीता, रामायण और महाभारत की किताबें पढ़ीं। भगत सिंह की जेल डायरी को कई बार पढ़ा। 90-95 साल पहले जेल में भगत सिंह ने लेख लिखे थे और जेल से बाहर कई क्रांतिकारी साथियों और युवाओं को खत लिखे थे और अंग्रेजों ने उन तक पहुंचाया। जबकि 15 अगस्त पर जेल से एक ही पत्र उन्होंने उपराज्यपाल को लिखा। वह यह कि जेल में होने की वजह से उनकी जगह आतिशी को झंडा फहराने की इजाजत दी जाए। लेकिन यह चिट्ठी एलजी साहब तक नहीं पहुंचाई गई। इस दौरान उन्होंने इसका पूरा ब्योरा दिया।