काशी की जमीन तक पहुंचते ही आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचारी नेताओं की अपनी लिस्ट गुम सी कर दी है। अब न उन्हें सलमान खुर्शीद को हराने की फिक्र है और न ही श्रीप्रकाश जायसवाल, मुलायम सिंह यादव, सोनिया गांधी, अनुराग ठाकुर, फारूख अब्दुल्ला समेत ऐसे तमाम नेताओं की, जिन्हें चुनाव में पटखनी देने के दावे के साथ केजरीवाल ने अपना लोक सभा चुनाव का अभियान शुरू किया था।
आम आदमी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत बनारस के सियासी समर में झोंक रखी है। खास बात यह कि इकलौते स्टार प्रचारक केजरीवाल के प्रचार अभियान के नक्शे में फिलहाल यह सीटें नहीं हैं। वहीं, दूसरे वरिष्ठ नेता भी बनारस की माला जप रह रहे हैं। दरअसल, संसदीय चुनाव में उतरने को ऐलान करते समय बीते 31 जनवरी को पार्टी की राष्ट्रीय कौंसिल की बैठक में केजरीवाल ने एक लिस्ट पढ़ी है।
इसमें कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव समेत दूसरे कई केंद्रीय मंत्रियों के नाम शामिल थे। केजरीवाल ने इनके खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारकर चुनाव में हराने का दम भरा था। खास बात यह कि पहली लिस्ट में भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का नाम नहीं था। आगे लिस्ट लंबी होने पर मोदी का नाम भी इसमें जुड़ गया।
मोदी के बाद राहुल गांधी पर फोकस करेंगे केजरीवाल टीम
आप ने शुरुआत में राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से कुमार विश्वास का नाम आगे बढ़ाकर अपने इरादे पर कायम रखने का संकेत भी किया था। लेकिन जैसे-जैसे देश का सियासी पारा चढ़ता गया, केजरीवाल की लिस्ट पिघलती गई। आज आलम यह है कि केजरीवाल समेत सभी वरिष्ठ नेताओं की जुबान पर बनारस के अलावा दूसरी किसी सीट का नाम ही नहीं आता।
लिस्ट में शामिल दक्षिण भारतीय सीटों को छोड़िए, केजरीवाल अभी तक हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर का दौरा करने का समय नहीं निकाल सके। यहां से उनकी लिस्ट में शामिल भाजपा के अनुराग ठाकुर और नेशनल कांफ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला मैदान में हैं। यही हालत रायबरेली, फर्रूखाबाद, कानपुर, मैनपुरी, आजमगढ़ जैसी तमाम सीटों की भी है।
जहां से केजरीवाल के पैमाने पर भ्रष्ट माने गए नेता चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन अब कोई आप का बड़ा नेता यहां का रुख नहीं कर रहा। नाम उजागर न करने की शर्त पर पार्टी के पदाधिकारी ने भी इसे अपनी रणनीतिक चूक माना। हालांकि उनका कहना था कि सियासी मैदान के फैलाव को देखते हुए अब हमारी कोशिश भाजपा और कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं को हराने की है। फिलहाल पूरा फोकस नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी पर है।
केजरीवाल ने फर्रूखाबाद व रायबरेली को भूलाया
पार्टी गठन के बाद आप ने अपनी पहली बड़ी रैली फर्रूखाबाद में सलमान खुर्शीद के खिलाफ की थी। उस समय दावा किया था कि सलमान खुर्शीद के खिलाफ कोई स्थानीय अशक्त चुनाव लड़ेगा और खुर्शीद को शिकस्त देगा। लेकिन उम्मीदवारी तय करते समय ऐसे शख्स को टिकट दिया गया, जिसने वरिष्ठ नेताओं के सहयोग न मिलने की दलील देते हुए अपना टिकट लौट दिया।
लिहाजा आनन-फानन में पार्टी को दूसरा नाम तय करना पड़ा। वहीं, किसी वरिष्ठ नेता ने भी यहां कोई रैली नहीं की है। रायबरेली के उम्मीदवार का नाम तय करते समय भी पार्टी पूरी तफ्तीश नहीं कर सकी। टिकट मिलने के कुछ ही दिन बाद उम्मीदवार ने मैदान छोड़ दिया।
ऐसे में आखिरी वक्त एक स्थानीय महिला कार्यकर्ता को उतारना पड़ा। अहम यह कि दोनों प्रत्याशियों के बारे में अगर आप जानकारी जुटाना चाहें तो पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट पर इनका प्रोफाइल अधूरा पड़ा है।