नगर निगम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है। शहर में सप्लाई किया जाने वाला 97 फीसदी पेयजल दूषित है। निगम कर्मचारी बिना क्लोरीन ट्रीटमेंट दिए ही जल आपूर्ति कर रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनवरी माह में लिए गए 72 नमूनों में से 70 में क्लोरीन नहीं पाई गई।
जिला स्वास्थ्य विभाग की कई टीमों ने जनवरी में घर-घर जाकर नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी के 72 नमूने इकट्ठा किए थे। जांच में पाया गया कि मात्र दो नमूनों में ही क्लोरीन की मात्रा मानक के मुताबिक पाई गई। बाकी 70 नमूनों में क्लोरीन शून्य थी।
स्वास्थ्य विभाग ने पानी के नमूनों की रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय और जिला उपायुक्त को भेजी है। रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम द्वारा घरों में पानी सप्लाई करने से पूर्व क्लोरीनेशन नहीं किया जा रहा है। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रामभगत ने बताया कि पानी के सैंपलों की रिपोर्ट नगर निगम और डीसी को भेज दी गई है।
जैविक अशुद्धियां दूर करता है क्लोरीन
क्लोरीन रोगाणु नाशक है। ओवरहेड टैंक और टयूबवेल के पानी में बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ आदि बीमारी पैदा करने वाली जैविक अशुद्धियां पनप जाती हैं। क्लोरीन से यह रोगाणु मर जाते हैं। यदि पानी का क्लोरिनेशन नहीं किया गया तो यह पानी रोगाणुओं की वजह से हैजा, टायफाइड, उल्टी-दस्त, पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनता है।
अधिकतर कालोनियों में हो रही दूषित जलापूर्ति
शहर के अधिकतर सेक्टरों और कालोनियों में नगर निगम द्वारा पेयजल आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा हुडा द्वारा भी कई इलाकों में पानी की सप्लाई की जाती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भरे गए सैंपलों में राहुल कॉलोनी, भगत सिंह कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी, बसेलवा कॉलोनी, भूड़ कॉलोनी, राजीव कॉलोनी, डबुआ, जवाहर कॉलोनी, सेक्टर-16, 15, बल्लभगढ़ के आदर्श नगर सहित कईक्षेत्रों के पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं।
खुद करें क्लोरिनेशन
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रामभगत ने बताया कि पानी को पीने योग्य बनाने के लिए खुद ही क्लोरिनेशन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बीस लीटर पानी में क्लोरीन की एक गोली डाल कर पानी को 30 से 45 मिनट तक खुला छोड़ देना चाहिए।
सके बाद पानी पीने योग्य हो जाता है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर क्लोरीन की गोलियां बांटी जाती हैं। जरूरत पड़ने पर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय से भी गोलियां ली जा सकती हैं।