गैर अधिसूचित क्षेत्र में चल रहे लघु उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश सरकार अगले दो सप्ताह में नई औद्योगिक नीति का ऐलान कर सकती है। नई नीति में मिक्स लैंड यूज को मंजूरी मिलना तय माना जा रहा है।
ऐसा हुआ तो जिले के 20 हजार लघु उद्योगों को संजीवनी मिल जाएगी। केवल फरीदाबाद ही नहीं बल्कि गुड़गांव, पानीपत, यमुनानगर सहित अन्य जिलों के तकरीबन एक लाख लघु उद्योगों को इसका फायदा मिलेगा।
औद्योगिक नगरी के नाम से पहचान कायम कर चुके फरीदाबाद को मैनुफेक्चरिंग हब भी कहा जाता है। लघु उद्योग इस शहर की रीढ़ से कम नहीं है। जिले के उद्योगों में करीब 9800 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश का आकलन लगाया जाता है।
सरकारी आंकड़ों पर गौर किया जाए तो बीते 50 साल में जिले में महज 4500 औद्योगिक प्लॉट काटे गए, लेकिन जिला उद्योग केंद्र में रजिस्टर्ड उद्योगों की संख्या 12121 है।
2014 के आंकड़ों के मुताबिक 3674 उद्योग अधिसूचित क्षेत्र में हैं, जबकि 8447 उद्योग गैर अधिसूचित क्षेत्र में बताए जाते हैं। लघु उद्योग भारती के मुताबिक ऐसे उद्योगों की संख्या 8 से 10 हजार है जो आज तक रजिस्टर्ड हुए ही नहीं।
ऐसे में गैर अधिसूचित क्षेत्र में 20 हजार से ज्यादा लघु उद्योग चल रहे हैं। प्रत्यक्ष रूप से ये उद्योग अपने साथ सवा तीन लाख श्रमिकों को जोड़े हुए हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से यह आंकड़ा 12 लाख पर पहुंचता है।
लंबे समय से इन गैर अधिसूचित क्षेत्र में चल रहे उद्योगों को नियमित करने की मांग उठाई जा रही है। प्रदेश की नई सरकार ने लघु उद्योगों के प्रति सकारात्मक रुख अपनाते हुए नई औद्योगिक नीति में इसे शामिल करने का फैसला लिया था।
इसको लेकर आठ बार एचएसआईडीसी, नगर निगम और उद्यमियों के बीच बैठक हो चुकी है। प्रस्ताव तैयार कर जून में ही सरकार को भेजा जा चुका है। अब इसका नतीजा आने को है। बताया जा रहा है कि 15 अगस्त से पहले नई नीति का ऐलान कर दिया जाएगा।
इन समस्याओं का सामना कर रहे लघु उद्यमी
-अनियमित क्षेत्र में चल रहे उद्योगों को अग्निशमन विभाग से नहीं मिल पाती एनओसी
-फैक्ट्री एक्ट के दायरे में न होने से लघु उद्योगों में 9 से अधिक श्रमिक रखने पर रोक
-अनियमित क्षेत्र में शॉप एक्ट के तहत चल रहे लघु उद्योग नहीं कर पा रहे हैं विस्तार
-पूरे प्रदेशभर में लघु उद्योगों के विस्तार में सरकारी मशीनरी बन रही है बड़ी बाधा
-स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा से वंचित रह जाते हैं अनियमित उद्योगों के कर्मचारी
सर्वे में मिले 12,550 उद्योग
मिक्स लैंड यूज की मांग ने जोर पकड़ा तो सरकार ने ऐसे क्षेत्रों का सर्वे कराने के निर्देश दिए, जहां लघु उद्योग चल रहे हैं। लघु उद्योग भारती के सहयोग से चीफ टाउन प्लानर ने सर्वे कर 31 पॉकेट चिह्नित किए जो गैर अधिसूचित क्षेत्र की श्रेणी में आते हैं। सर्वे के दौरान 12 हजार 550 ऐसे उद्योगों की पहचान की गई जो नियमित नहीं हैं। नगर निगम आयुक्त के माध्यम से इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी गई थी।
सबसे ज्यादा लघु उद्योग वाले क्षेत्र
सरूरपुर खेड़ी गुजरान 1500
एसजीएम नगर 1500
मुजेसर 1000
डबुआ व डबुआ एक्सटेंशन 1000
पर्वतीय कालोनी 800
बल्लभगढ़ व आसपास 600
संजय कॉलोनी 500
एनआईटी नंबर 3 ---- 500
गैर अधिसूचित क्षेत्र में चल रहे लघु उद्योगों को लेकर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। पूरी मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा है। जल्द ही कोई अच्छी खबर सरकार की तरफ से मिलेगी।
-रवि भूषण खत्री, महासचिव, लघु उद्योग भारती
नई औद्योगिक नीति जल्द आने के आसार है। गैर अधिसूचित क्षेत्र को लेकर भी पॉलिसी में काफी कुछ किया गया है। हालांकि, पॉलिसी स्वीकृत होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
-सलिल नारंग, अतिरिक्त महाप्रबंधक, एचएसआईडीसी