राष्ट्रपति भवन की लाइटें की गई मंदी
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धरती को बचाने के लिए अर्थ आवर मनाया गया। शनिवार रात 8:30 से 9:30 बजे तक स्वेच्छा से दिल्ली वालों ने बिजली के उपकरणों को बंद रखा। अपने घरों की लाइट्स कुछ देर के लिए बंद रखा। दक्षिण, पश्चिम, मध्य और पूर्वी दिल्ली में रहने वाले अर्थ आवर में शामिल हुए। अर्थ आवर के दौरान लोगों ने घरों व कार्यस्थलों की गैरजरूरी लाइट्स व बिजली उपकरण बंद रखें।
अर्थ ऑवर के दौरान राष्ट्रपति भवन की रोशनी मंद कर दी गई। दिल्ली में इंडिया गेट ने भी अर्थ आवर का पालन करने के लिए अपनी रोशनी मंद कर दी। इसी तरह मंदिरों में भी इस दौरान रौशनी मंद रही। सरकारी भवनों में भी इस दौरान गैर जरूरी लाइट्स को बंद रखा गया।
इस दौरान दिल्ली वालों ने 171 मेगावॉट बिजली की बचत की। बीएसईएस खुद भी अपने 400 से अधिक ऑफिसों में अर्थ आवर के दौरान गैर जरूरी लाइट्स का उपयोग नहीं किया। बीएसईएस उपभोक्ताओं ने 135 मेगावॉट बिजली की बचल की।विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन ने धरती के लिए संकट को और बढ़ा दिया है। अचानक से बदलने वाला मौसम, अप्रत्याशित तापमान इसी संकट की ओर इशारा करते हैं। ऐसे में, जरूरी है कि हम अपव्ययी आदतों को छोड़कर ऐसी जीवनशैली अपनाएं, जो धरती के अनुकूल हो। अर्थ आवर इसी दिशा में एक कदम है।
अर्थ आवर, डब्लूडब्लूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर/ वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड) का सालाना कार्यक्रम है, जिसके तहत दुनियाभर के लोगों से अपील की जाती है कि वे जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए, अपने घरों और कार्यस्थलों पर गैरजरूरी लाइट्स और बिजली चालित उपकरणों को तय समय के दौरान बंद रखें। बीएसईएस ने भी क्षेत्र के 1.8 करोड़ निवासियों से अपील की थी कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सही कदम उठाएं।