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जोश, जज्बा और जुनून: एवरेस्ट फतह कर गाया राष्ट्रगान, पढ़िए विंग कमांडर की जुबानी, कितना खतरनाक था हर पल

Fri, 03 Jun 2022 03:53 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

विंग कमांडर विक्रांत उनियाल दून पहुंचे और महादेवी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में छात्राओं से मुखातिब हुए। इस दौरान विंग कमांडर विक्रांत ने कहा कि मन में कुछ करने का जुनून हो तो कोई भी असंभव लगने वाला कार्य संभव हो जाता है। उन्होंने कहा कि ऊंचाई को छूने के लिए बड़ों के आशीर्वाद के साथ जुनून भी जरूरी है।
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विंग कमांडर विक्रांत उनियाल का सम्मान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह कर लौटे देहरादून निवासी एयरफोर्स के विंग कमांडर विक्रांत उनियाल का महादेवी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में स्वागत किया गया। महादेवी कन्या पाठशाला कॉलेज सोसायटी ने उन्हें सम्मानित भी किया। इस दौरान विंग कमांडर ने छात्राओं के साथ एवरेस्ट फतह के अपने अनुभव साझा किए।
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उन्होंने कहा कि ऊंचाई को छूने के लिए बड़ों के आशीर्वाद के साथ जुनून भी जरूरी है। देहरादून के गुजराड़ा मानसिंह, सहस्रधारा रोड निवासी विंग कमांडर विक्रांत उनियाल ने 21 मई को पहली बार में ही माउंट एवरेस्ट फतह कर न केवल भारत बल्कि उत्तराखंड का भी मान बढ़ाया था। आजादी के अमृत महोत्सव पर विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर राष्ट्रगान गाने वाले वह पहले शख्स हैं।

विंग कमांडर विक्रांत उनियाल दून पहुंचे और महादेवी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में छात्राओं से मुखातिब हुए। विंग कमांडर विक्रांत ने कहा कि मन में कुछ करने का जुनून हो तो कोई भी असंभव लगने वाला कार्य संभव हो जाता है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि एवरेस्ट पर पहुंचना सामान्य पर्वत पर चढ़ने जैसा नहीं है। क्योंकि, वह पूरी तरह से बर्फीली चोटी है। जैसे-जैसे आप ऊपर पहुंचते हैं, ऑक्सीजन की कमी शुरू हो जाती है।
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अगर समय का ध्यान नहीं रखा गया तो जीवन खतरे में पड़ सकता

एवरेस्ट जाने के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर साथ ले जाना पड़ता है, इसलिए समय का ध्यान रखना जरूरी है। अगर समय का ध्यान नहीं रखा गया तो जीवन खतरे में पड़ सकता है। कहा कि आदमी ऊपर तो पहुंच जाता है, लेकिन उतरने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। जरा सी चूक खतरनाक हो सकती है।

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वर्ष 1997 में एनडीए और वर्ष 2000 में कमीशन पाने वाले विक्रांत ने कहा कि इसकी बेहद खुशी है कि उन्होंने पहले ही प्रयास में एवरेस्ट फतह किया। गांव पहुंचने पर गुजराड़ा विकास समिति ने भी विंग कमांडर का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान भाजपा नेता रविंद्र जुगरान, एमकेपी सोसायटी के सचिव जितेंद्र नेगी, विंग कमांडर विक्रांत के पिता एके उनियाल, माता उमा उनियाल, डॉ. आभा मिश्रा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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