टीएचडीसी को टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल 830 मीटर तक बढ़ाने की अनुमति मिलने पर आरएल 835 मीटर से ऊपर बसे गांवों के लिए मुसीबतें खड़ी हो गई।
42 वर्ग किमी में फैली झील का जलस्तर बढ़ाने से भागीरथी और भिलंगना घाटी में 44 से अधिक गांवों को भूधंसाव का सामना करना पडे़गा। ऐसे प्रभावित गांवों का विस्थापन किए बगैर जलस्तर बढ़ाने की अनुमति देने के निर्णय को प्रभावितों ने गैर जिम्मेदाराना बताया है।
उन्होंने कहा कि विस्थापन की कार्रवाई पूरी होने से पहले जलस्तर बढ़ाने का निर्णय वापस नहीं लिया को आंदोलन शुरू किया जाएगा।
झील से सटे गांवों में हुआ था भारी भूधंसाव
2010 में टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल 832 मीटर तक बढ़ाने पर झील से सटे गांवों में भारी भूधंसाव हुआ था। मदननेगी में तो दर्जनों आवासीय मकान जमीजोंद हो गए थे। जबकि अन्य क्षेत्रों में भी आवासीय भवन, खेती और सड़कें डैमेज हुई थी।
जिससे कुछ दिनों तक उन क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। शासन-प्रशासन ने झील से प्रभावित क्षेत्रों के सर्वे के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाकर जांच कराई थी, जिसमें कमेटी ने झील से सटे 44 से अधिक गांवों की विस्थापन की संस्तुति की थी।
लेकिन सरकार ने झील प्रभावितों गांवों का पुनर्वास किए बगैर टीएचडीसी को आएल 830 मीटर तक जलभराव करने की अनुमति देकर प्रभावितों को अपने हाल पर छोड़ दिया है। जिससे लोगों में खासा रोष बना हुआ है।
इन गांवों पर मंडरा रहा है खतरा
मदननेगी, जलवालगांव, नंदगांव, इंद्रोला, उठड़, पिपोला, गडोलिया, पडागली, बौर, मोटणा, भैंगा, चांठी, जणगी, सेमघंडयाल्की, सौड़ उप्पू, सिल्ला उप्पू और कंगसाली सहित चिन्यालीसौड़ क्षेत्र के कई गांव।
वर्ष 2010 में झील का जलस्तर 832 मीटर भरने से 835 से ऊपर के गांवों में भारी भूस्खलन हो गया था। सरकार ने झील से हुए नुकसान की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी तो बनाई लेकिन उसकी रिपोर्ट पर अमल नहीं किया। प्रभावित गांवों का विस्थापन करने से पहले जलस्तर 830 करने की अनुमति देकर प्रभावितों के साथ अन्याय किया जा रहा है। इस निर्णय का पूरजोर विरोध किया जाएगा।
- प्रेमदत्त जुयाल, अध्यक्ष बांध प्रभावित संघर्ष समिति