बारिश से ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर पड़ने वाले नालों और रपटे उफान पर रहे। इससे गांवों के लिए घटों तक आवाजाही बंद रही। कोई दुर्घटना न हो इसके लिए रपटों के दोनों छोर पर पुलिस तैनात करनी पड़ी।
चीला-ऋषिकेश मार्ग के रपटे में पानी आने से करीब दो घंटे यातायात बाधित रहा। इससे दोनों तरफ सैकड़ों लोग फंसे रहे। कई लोगों को लौटना पड़ा। पथरी क्षेत्र के दीनारपुर से सराय मार्ग पर पथरी रोह नदी पर एक्कड़ कला गांव के निकट रपटा भी उफान पर था। पथरी से बहादराबाद मार्ग पर पड़ने वाला सुखरासा रपटे में भी पानी आने से लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ी।
लालढांग नहर भी उफान पर रही। पानी बढ़ने से अय्यूब के धान के खेतों और घरों में पानी भर गया। राजवीर सिंह बिष्ट का घर और खेत भी जलमग्न हो गए। डालूपुरी नाले के उफान से कई लोगों के घरों में पानी घुस गया। रवासन नदी के उफान के चलते नदी में कटाव को रोकने के लिए बनाई पिचिंग तेज बहाब में बह गई। जिससे नदी गांव की ओर कटाव करने लगी हैं। लालढांग से चिल्लरखाल कच्चे मार्ग पर पड़ने वाले नालों और रपटों में भी पानी का बहाव अधिक होने से आवागमन बंद रहा।
जेसीबी से खोदाई करके निकाला पानी
लालढांग क्षेत्र के कई गांव पानी से घिर गए। सैकड़ों बीघा खेती जलमग्न हो गई। घरों में पानी घुसने पर ग्रामीणों ने जेसीबी से खोदाई करवाई और पानी निकाला। दोपहर बाद जलस्तर कम होने से ग्रामीणों ने राहत ली। कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने गैंडीखाता खदरी में जलभराव क्षेत्र का जायजा लिया।
ग्रामीण सत्यपाल, परमजीत सिंह, नरेश कुमार, भगवान रावत, सरोप सिंह, आजाद पोखरियाल, विरेंद्र सिंह ने बताया कि हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे में निर्माण के दौरान गांव के बरसाती पानी की निकासी बंद कर दी गई। जिसके बाद बारिश होने पर गांव में जलभराव हो रहा है। गैंडीखाता पंचायत के खदरी गांव में करीब एक हजार बीघा कृषि भूमि में पानी भर गया। सैकड़ों परिवारों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा।