वहीं मसूरी शहर में पिछले दिनों हुई बारिश से कई मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा। मालरोड पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं। कई जगह जलभराव की स्थिति भी बनी हुई है।
मसूरी की धड़कन कही जाने वाली मालरोड बारिश के चलते गड्ढों में तब्दील हो गई है। एसबीआई के सामने, आंबेडकर चौक के पास मालरोड की हालत सबसे ज्यादा खराब है। जलभराव के चलते लोगों को पैदल चलने में भी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता का कहना है कि बारिश के चलते मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहे हैं। मालरोड को ठीक करने के लिए लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिन स्थानों पर पालिका को मरमम्त करनी है, वहां जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।
वहीं, देहरादून में बिंदाल एवं रिस्पना के संगम दौड़वाला में पानी के तेज बहाव के कारण लगातार भू-कटाव हो रहा है। जिससे खेतों को तो नुकसान पहुंच रहा है। साथ में कटाव के कारण सैनिक कॉलोनी को भी लगातार खतरा उत्पन्न हो रहा है।
भारी बारिश में नदी का पानी कॉलोनी तक पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन प्रेषित कर तत्काल भू-कटाव रोकने के लिए स्थायी समाधान करने की मांग की है।
सैनिक कॉलोनी में लगभग पांच सौ परिवार रहते हैं। नदी की तीव्रता के कारण यहां लगातार भू-कटाव हो रहा है। जिससे कॉलोनी को खतरा उत्पन्न हो गया है। तेज बारिश में हमेशा कॉलोनी के लोगों को भय में रात काटनी पड़ती है।
इस क्षेत्र के लोगों ने जिलाधिकारी से मांग की कि यहां भू-कटाव रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। जब तक स्थायी व्यवस्था नहीं होती है, तब तक अस्थायी व्यवस्था की जाए। अगर यहां भू-कटाव रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती है तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ज्ञापन प्रेषित करने वालों में एमएस रावत, शूरवीर सिंह राणा आदि शामिल रहे।
धारचूला (पिथौरागढ़) में भूस्खलन के कारण बीआरओ की तवाघाट सोबला और सीपीडब्ल्यूडी की सोबला ढाकर चीन सीमा सड़क 54 दिन से बंद है। इससे तल्ला, मल्ला दारमा और चौदास घाटी के छोटे-बड़े 30 गांवों के लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है। सड़क बंद होने से बुजुर्ग, महिलाएं, पुरुष और बच्चे सड़क मार्ग से तहसील मुख्यालय नहीं आ पा रहे हैं। जरूरी काम होने पर ही लोग समूह बनाकर जान जोखिम में डालकर 10 से 15 किमी की पैदल यात्रा करने के लिए मजबूर हैं। क्षेत्र के लोगों ने घाटी में राशन और टीकाकरण के लिए हेलिकॉप्टर के साथ ही एक स्वास्थ्य कर्मी तैनात करने की मांग की है।
सोबला-ढाकर चीन सीमा सड़क बंद होने से लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस कारण तीन लोगों की मौत हो चुकी है। समय पर इन लोगों को उपचार मिल जाता तो शायद उनकी जान बच जाती। सड़क बंद होने से तेल, दाल, फल-सब्जी, गैस, स्वास्थ्य सुविधा, टीकाकरण शिविर आदि की समस्या होने लगी है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चीन सड़क होने के बाद भी प्रशासन और कार्यदायी संस्था की लेटततीफी से सीमांत के लोगों में आक्रोश है। इधर, जनप्रतिनिधि सड़क खुलवाने के लिए आंदोलन करने की रणनीति बनाने लगे हैं।
रं कल्याण संस्था और दीलिंग दारमा सेवा समिति के पदाधिकारियों ने एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला से समस्या सुलझाने की मांग की। उन्होंने मारछा, फील्म, दुग्तु और नांगलिग आदि गांवों में हेलिकॉप्टर से खाद्य सामग्री भेजने का सुझाव दिया है। एसडीएम से मिलने वालों में पूर्व चेयरमैन अशोक नबियाल, कृष्णा गर्ब्याल, राम सिंह ह्यांकी, दिनेश चलाल, दीपक रौंकली, जयेंद्र फिरमाल, महेश होतियाल, सौरव मर्तोलिया आदि शामिल रहे।
आईटीबीपी और सेना भी परेशान
सड़क बंद होने के कारण स्थानीय लोगों के साथ ही सीमा की सुरक्षा में लगे सेना और आईटीबीपी के जवानों को रसद पहुंचाने और आवाजाही में भी काफी दिक्कतें हो रहीं हैं। सूत्रों से जानकारी मिली है कि गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से कार्यदायी संस्था को एक महीने में हर हालत में सड़क खोलने के निर्देश मिले हैं।