योजना में राष्ट्रीयकृत बैंकों, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, सहकारी बैंकों के माध्यम से सभी पात्र विनिर्माणक, सेवा और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए ऋण दिया जाएगा। एमएसएमई विभाग योजना के तहत मार्जिन मनी की धनराशि अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाएगा। एमएसएमई नीति के अनुसार वर्गीकृत श्रेणी ए में मार्जिन मनी की अधिकतम सीमा कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, श्रेणी बी में 20 प्रतिशत तथा सी व डी श्रेणी में कुल परियोजना लागत का 15 प्रतिशत तक देय होगी।
उद्यम के दो वर्ष तक सफल संचालन के बाद मार्जिन मनी अनुदान के रूप में समायोजित की जाएगी। योजना के तहत सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत और विशेष श्रेणी के लाभार्थियों को पांच प्रतिशत अंशदान के रूप में जमा करना होगा।
योजना के तहत आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। शैक्षिक योग्यता की बाध्यता नहीं है। योजना के तहत उद्योग, सेवा एवं व्यवसाय क्षेत्र में वित्त पोषण सुविधा उपलब्ध होगी। आवेदक अथवा उसके परिवार के सदस्य को योजना के तहत केवल एक बार लाभांवित किया जाएगा। लाभार्थियों का चयन अधिक आवेदन प्राप्त होने पर प्रोजेक्ट को देखते हुए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।
ये है आवेदन की प्रक्रिया
आवेदक को महाप्रबंधक एवं जिला उद्योग केंद्रों में जाकर या ऑनलाइन आवेदन करना होगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए एमएसएमई विभाग के नियंत्रणाधीन उद्योग निदेशालय नोडल विभाग होगा। योजना का क्रियान्वयन जिला स्तर पर जिला उद्योग केंद्र करेंगे।
रिवर्स पलायन की दिशा में उठाया कदम
योजना उत्तराखंड लौट कर आए प्रवासियों के रिवर्स पलायन को लेकर शुरू की गई है। राज्य के उद्यमशील युवाओं और कोविड-19 के कारण उत्तराखंड लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाएगी। इससे कुशल और अकुशल दस्तकार, हस्तशिल्पी और बेरोजगार युवा खुद के व्यवसाय के लिए प्रोत्साहित होंगे।