वैसे पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा को लोग सीधे चिपको आंदोलन और टिहरी आंदोलन से ही जोड़ते हैं। लेकिन, कम ही लोग जानते हैं कि उनका सामाजिक सरोकार से वास्ता तभी शुरू हो गया था, जब वह महज 13 साल के थे। वह गांधी जी के विचारों से प्रेरित थे और स्वतंत्रता संग्राम में उनके आंदोलनों से काफी प्रभावित थे।
वह पढ़ाई के लिए लाहौर गए थे तो वहां भी बहुत ही कम उम्र में समानता के अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी। उन्होंने टिहरी के आसपास शराब के खिलाफ भी आंदोलन चलाया था, लेकिन बाद में वन और पर्यावरण की रक्षा के प्रति पूरी तरह से समर्पित हो गए थे।