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यादें:...जब बस दुर्घटना में 18 लोगों की मौत से टूट गए थे सुंदरलाल बहुगुणा, बेहतर उपचार न मिलने पर हुए थे आहत 

Fri, 21 May 2021 10:39 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई टिहरी

सार

टिहरी बांध के विरोध में 1992 में पुरानी टिहरी में अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् सुंदर लाल बहुगुणा को बस दुर्घटना ने झकझोर दिया था।
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सुंदरलाल बहुगुणा - फोटो : Twitter/@shreyadhoundial
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विस्तार
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टिहरी के भिलंगना ब्लॉक के बालगंगा घाटी के सिल्यारा, गनगर, सेंदुल, सरांस गांव से लोग डा. वाचस्पति मैठाणी के नेतृत्व में बहुगुणा के आंदोलन को समर्थन देने 20 मार्च को टिहरी आए थे। धरने को समर्थन देने के बाद शाम को लौटते हुए पिलखी बौंर के समीप बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। बस में सवार 40 में से 18 लोगों की मौत हो गई थी जबकि अन्य 22 लोग घायल हो गए थे।

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बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व सदस्य चंद्र किशोर मैठाणी ने बताया कि श्रीदेव सुमन संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती घायलों को बेहतर उपचार न मिलने पर बहुगुणा बहुत आहत हो गए थे। मृतक परिजनों को मुआवजे के लिए उन्होंने फंड भी बनाया था। एक स्मारक बनाने की बात कही थी, लेकिन किन्हीं कारणों से स्मारक नहीं बन पाया।
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बस दुर्घटना होने पर बहुगुणा ने अनशन स्थल से गांव में एक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने लिखा था कि महाविपदा से मैं दुखी हूं, लेकिन अनशन पर बैठे होने के कारण प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा नहीं हो पा रहा हूं। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपने सिद्धांत और सत्य पर डटे रहने की अपील की थी। बताया कि छतियारा नहर, बालगंगा महाविद्यालय, इंटर कॉलेज निर्माण में बहुगुणा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। 

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बडियारगढ़ में गिरफ्तार किए गए थे बहुगुणा

श्रीनगर में विकासखंड कीर्तिनगर के बडियारगढ़ क्षेत्र से चिपको आंदोलन के समर्थन में सुंदरलाल बहुगुणा ने जनवरी 1978 में पद यात्रा की थी। इस दौरान बडियार में ही पेड़ों के कटान के विरोध में वह अनशन पर बैठ गए थे, जिसके बाद अनशन के 10वें दिन उन्हें गिरफ्तार कर पुरानी टिहरी जेल भेज दिया गया था। हिमालय बचाओ आंदोलन के संयोजक समीर रतूड़ी ने बताया कि उस दौरान आंदोलन में उनके साथ उनकी पत्नी विमला बहुगुणा, बेटा राजीव नयन बहुगुणा, धूम सिंह नेगी, कुंवर प्रसून, विजय जड़धारी व घनश्याम सैलानी शामिल थे।

पर्यावरणविद् एवं बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं के विरोधी सुंदरलाल बहुगुणा का श्रीनगर व कीर्तिनगर से लगाव रहा है। पर्वतीय विकास एवं शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा.अरविंद दरमोडा बताते हैं कि 24-25 अप्रैल 2011 को गढ़वाल विवि में पर्वतीय विकास शोध केंद्र की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया  था। जिसमें श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के कारण हो रही समस्या  पर चर्चा की गई थी।

इस दौरान सुंदर लाल बहुगुणा ने कहा था कि परियोजना कंपनी से जो भी समस्याएं हैं उन्हें मीटिंग हालों के बजाया उचित मंचों पर रखा जाना चाहिए। इसके बाद गंगा आरती समिति के अध्यक्ष प्रेम बल्लभ नैथानी के अनुरोध पर बहुगुणा अलकनंदा नदी किनारे शारदा घाट भी पहुंचे।
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