कोरोना के कम होते मामलों के बीच उत्तराखंड सरकार ने कक्षा छह से 12वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोलने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से अभिभावक चिंतित हैं। अभिभावकों का कहना है कि विशेषज्ञ अभी कोरोना की तीसरी लहर आने की बात कर रहे हैं। ऐसे में स्कूल खोलने की जल्दबाजी में कहीं बच्चे कोरोना की चपेट में न आ जाएं।
अभिभावकों का कहना है कि सरकार पहले बच्चों के लिए वैक्सीन की व्यवस्था करे उसके बाद बच्चों को स्कूल बुलाया जाए। अगर कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे प्रभावित होंगे तो सरकार और जनता दोनों के लिए भारी समस्या होगी। ऐसे में अभी ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर सरकार को ध्यान देना चाहिए, जिससे बच्चों को सुरक्षित माहौल प्रदान कर शिक्षा से जोड़ा जा सके।
कोरोना के मामले भले ही कम हुए हैं, लेकिन अभी खतरा टला नहीं है। ऐसे में स्कूल खोलने की जल्दबाजी कहीं बच्चों के लिए भारी न पड़ जाए। अभी बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है।
- मनीष शर्मा, अभिभावक
टीके से ही कोरोना की जंग जीती जा सकती है, लेकिन बच्चों को कोरोना का टीका लगाए बिना स्कूल भेजना ठीक नहीं है। इसलिए सरकार को पहले बच्चों के वैक्सीनेशन की व्यवस्था करनी चाहिए।
- रितु गोयल, अभिभावक
कोरोना काल में बच्चों के लिए स्कूल खोलने पर उनकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। बिना वैक्सीन के अभी बच्चों को स्कूल भेजना किसी खतरे से खाली नहीं है। अभी बच्चों के लिए स्कूल खोलने का फैसला जल्दबाजी करना होगा।
- पुष्प लता, अभिभावक
लंबे समय से घर पर रहकर और ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चे ऊब चुके हैं। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होने से अभिभावक भी चिंतित थे। सरकार के स्कूल खोलने वाले फैसले का हम स्वागत करते हैं। इससे शिक्षा को हो रहे नुकसान से बचा जा सकता है।
- प्रेम कश्यप, अध्यक्ष, प्रिंसिपल्स प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन