सरकार ने अक्तूबर 2014 में 10 करोड़ की लागत से कोरियाई योसिन इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन कंसलटेंट कंपनी से डिजाइन तैयार करवाया। इससे पहले निर्माण के नाम पर केवल चार टॉवर और 260 मीटर एप्रोच पुल बनाने में ही एक अरब 25 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए।
कंसलटेंट ने पुल निर्माण हेतु एक अरब 75 करोड़ की डीपीआर सरकार देकर 75 करोड़ की धनराशि देकर फरवरी 2015 में फिर से काम शुरू करवाया। अगस्त 2017 तक पुल निर्माण का लक्ष्य रखा था, लेकिन विभिन्न कारणों से निर्माण पूरा नहीं हुआ।
इसके बाद वर्तमान राज्य सरकार ने 75 करोड़ निर्माण कार्य को और 15 करोड़ कंसलटेंट के अनुबंध बढ़ाने को दिया, लेकिन दुर्भाग्य से अगस्त 2018 में निर्माण के दौरान मुख्य पुल के तीन सस्पेंडर टूट गए। जिससे पुल फिर विवादों में आ गया। आखिरकार अगस्त 2019 में मुख्य पुल आपस में जोड़ दिया गया। चार अक्तूबर को पुल पर ट्रायल सफल रहा था।
डोबरा-चांठी पुल देश का सबसे पहला झूला पुल है, जिसकी लंबाई 725 मीटर है और जो भारी वाहन चलाने लायक बना है। समुद्रतल से 850 मीटर की ऊंचाई पर पुल बना है। टिहरी झील को अधिकतम आरएल 830 मीटर तक भरा जा सकता है। पुल की चौड़ाई सात मीटर है, जिसमें से साढ़े पांच मीटर पर वाहन चलेंगे।
बाकी के डेढ़ मीटर पर पुल के दोनों तरफ 75-75 सेंटीमीटर फुटपाथ बनाए गए हैं। पुल की कुल लंबाई 725 मीटर है, जिसमें से 440 मीटर झूला पुल है। वहीं 260 मीटर डोबरा साइड और 25 मीटर का एप्रोच पुल चांठी की तरफ बनाया गया है।
पुल के दोनों किनारों पर 58-58 मीटर ऊंचे चार टॉवर निर्मित हैं। प्रोजेक्ट मैनेजर/ लोनिवि के ईई एसएस मखलोगा का कहना है कि भारी वाहन चलने लायक यह देश का पहला झूला पुल है।