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डोबरा-चांठी पुल: विवादों के बीच जनता ने किया लंबा संघर्ष, अब दो लाख की आबादी के सपनों को लगेंगे पंख 

Sun, 08 Nov 2020 10:31 AM IST
अलका त्यागी विजय दास, अमर उजाला, नई टिहरी

सार

  • शुरूआती दौर से विवादों में रहे डोबरा-चांठी से सपनों को लगेंगे पंख
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डोबरा चांठी पुल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शुरूआती दौर से ही विवादों में रहे डोबरा-चांठी पुल बनने से दो लाख की आबादी के सपनों को पंख लगेंगे। जनता के संघर्षों से बने पुल से झील बनने के कारण अलग-थलग पड़े प्रतापनगर वासियों के लिए पुल जीवन रेखा का काम करेगा। प्रतापनगर के लोगों को अब 50-60 किमी अतिरिक्त सफर तय नहीं करना पड़ेगा। 

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वर्ष 2005 में टिहरी बांध की झील के बनने के कारण प्रतापनगर के आवागमन के रास्ते बंद हो गए थे, जिसके चलते लोगों ने लंबे समय तक लंबगांव, ओखलाखाल से लेकर कांग्रेस मुख्यालय देहरादून में प्रभावितों ने धरना-प्रदर्शन शुरू किया।

भारी जन दबाव के कारण तत्कालीन सीएम नारायण दत्त तिवारी ने पुल की स्वीकृति दी। जनवरी 2006 में भागीरथी नदी पर 592 लंबा मोटर पुल का निर्माण शुरू हुआ। शुरूआती दौर में पुल को दो साल के अंदर बनकर तैयार होना था, लेकिन निर्माण कार्य के बीच में ही पुल का डिजाइन बदलकर लंबाई 725 मीटर कर दी थी। इससे पुल की लागत भी एक अरब 25 करोड़ बढ़ गई। इससे पुल निर्माण में काफी विलंब हुआ।
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आईआईटी रुड़की ने भी डिजाइन एक साथ देने के बजाए विभिन्न चरणों में दिया, लेकिन मार्च 2012 में चौरास झूला पुल टूटने से सरकार ने पुल के डिजाइन को क्रॉस चेकिंग के लिए आईआईटी खड़कपुर भेज दिया। वहां के इंजीनियरों ने डिजायन में कई कमियां बताते हुए इसे फेल कर दिया, जिसके चलते तत्कालीन सरकार ने पुल का निर्माण रोक दिया। 

एप्रोच पुल बनाने में ही एक अरब 25 करोड़ रुपये खर्च कर दिए

सरकार ने अक्तूबर 2014 में 10 करोड़ की लागत से कोरियाई योसिन इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन कंसलटेंट कंपनी से डिजाइन तैयार करवाया। इससे पहले निर्माण के नाम पर केवल चार टॉवर और 260 मीटर एप्रोच पुल बनाने में ही एक अरब 25 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए।

कंसलटेंट ने पुल निर्माण हेतु एक अरब 75 करोड़ की डीपीआर सरकार देकर 75 करोड़ की धनराशि देकर फरवरी 2015 में फिर से काम शुरू करवाया। अगस्त 2017 तक पुल निर्माण का लक्ष्य रखा था, लेकिन विभिन्न कारणों से निर्माण पूरा नहीं हुआ।

इसके बाद वर्तमान राज्य सरकार ने 75 करोड़ निर्माण कार्य को और 15 करोड़ कंसलटेंट के अनुबंध बढ़ाने को दिया, लेकिन दुर्भाग्य से अगस्त 2018 में निर्माण के दौरान मुख्य पुल के तीन सस्पेंडर टूट गए। जिससे पुल फिर विवादों में आ गया। आखिरकार अगस्त 2019 में मुख्य पुल आपस में जोड़ दिया गया। चार अक्तूबर को पुल पर ट्रायल सफल रहा था। 
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डोबरा-चांठी देश का पहला लंबा भारी वाहन पुल   

डोबरा-चांठी पुल देश का सबसे पहला झूला पुल है, जिसकी लंबाई 725 मीटर है और जो भारी वाहन चलाने लायक बना है। समुद्रतल से 850 मीटर की ऊंचाई पर पुल बना है। टिहरी झील को अधिकतम आरएल 830 मीटर तक भरा जा सकता है। पुल की चौड़ाई सात मीटर है, जिसमें से साढ़े पांच मीटर पर वाहन चलेंगे।

बाकी के डेढ़ मीटर पर पुल के दोनों तरफ 75-75 सेंटीमीटर फुटपाथ बनाए गए हैं। पुल की कुल लंबाई 725 मीटर है, जिसमें से 440 मीटर झूला पुल है। वहीं 260 मीटर डोबरा साइड और 25 मीटर का एप्रोच पुल चांठी की तरफ बनाया गया है।

पुल के दोनों किनारों पर 58-58 मीटर ऊंचे चार टॉवर निर्मित हैं। प्रोजेक्ट मैनेजर/ लोनिवि के ईई एसएस मखलोगा का कहना है कि भारी वाहन चलने लायक यह देश का पहला झूला पुल है।
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