चालक-परिचालक को अतिरिक्त कमाई का लालच
दरसअल, बस के चालक और परिचालक अतिरिक्त कमाई के लालच में जाने-अनजाने इस तस्करी के धंधे में पड़ रहे हैं। बॉर्डर क्षेत्रों में बस चेकिंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसी बात का तस्कर फायदा उठा रहे हैं। यदि कहीं चेकिंग होती भी है तो केवल सवारियों के सामान आदि की। चालक-परिचालक की चेकिंग नहीं होती है। कई बार देखने में यह भी आया है कि चालक-परिचालक को संबंधित पैकेट के बारे में जानकारी भी नहीं होती है कि उसमें आखिर रखी हुई वस्तु क्या है? ऐसे में दो साल पहले भी डॉग स्क्वायड के माध्यम से चेकिंग के निर्देश दिए गए थे। इनमें भी बसों की चेकिंग कम ही होती थी।
तस्करों की संपत्तियां अटैच करने को यूपी से होगी बात
एनडीपीएस एक्ट में नशा तस्करों की संपत्तियों को जब्त करने का भी अधिकार है। दो साल पहले बरेली के एक परिवार की करोड़ों रुपये की संपत्तियों को एसटीएफ के माध्यम से जब्त कराया गया था। अब भी बरेली के कई तस्करों के नाम सामने आए हैं। डीजीपी के अनुसार इनकी संपत्तियों के आंकलन और जब्त करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ संपर्क किया जा रहा है।
यह तस्करों का नया ट्रेंड है। इस पर अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को पत्र लिखा गया है। ताकि, सभी बस पुलिस की निगरानी में रहें। इसके लिए और भी बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा।
- अशोक कुमार, डीजीपी