दून ने अपनाई थी जीरो एफआईआर की प्रक्रिया
साइबर के मामलों में साइबर थाना देहरादून ने सबसे पहले पीड़ितों की मदद के लिए जीरो एफआईआर की प्रक्रिया को अपनाया था। इसे गृह मंत्रालय ने भी सराहा है। सरकार के सीसीपीडब्लूसी प्रोजेक्ट के तहत दिए गए लक्ष्य को स्पेशल टास्क फोर्स ने 100 प्रतिशत पूरा किया है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से साइबर थाना दून ने न्यायाधीशों, अभियोजन अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को साइबर संबंधित प्रशिक्षण भी दिया। इसके अलावा 300 पुलिस कर्मियों को प्रारंभिक प्रशिक्षण, 148 कर्मियों को बेसिक कम एडवांस डिजिटल इंवेस्टिगेशन, जिलों में पढ़ाने वाले 30 कर्मियों को ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) प्रशिक्षण दिया गया।
देशभर की पुलिस को दिया प्रशिक्षण
साइबर थाना देहरादून के पुलिस उपाधीक्षक अंकुश मिश्रा ने तीन दिवसीय साइबर प्रशिक्षण प्रोग्राम झारखंड पुलिस को रांची में दिया। इसके साथ ही आईफोरसी के सहयोग से पूरे देश की समस्त पुलिस और सेंट्रल एजेंसी के एक हजार ऑफिसर और कर्मियों को भी साइबर संबंधित दो दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है।
70 हजार से अधिक को किया जागरूक
साइबर थाना देहरादून की ओर से प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत स्कूल कॉलेज के बच्चों और अध्यापकों को साइबर क्राइम को लेकर जागरूक किया जाता है। इसके तहत अब तक 70 हजार से ज्यादा लोगों को साइबर संबंधित जागरूकता प्रदान की गई है। इस साल साइबर कॉमिक्स का भी एक नया प्रयोग किया गया। जिससे बच्चों के माध्यम से भी साइबर जागरुकता करने में सहायता मिलती है। सभी प्रयासों को डाटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी सराहा है।