वरिष्ठ यूरोलाजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. किम जे मामिन ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उत्तराखंड राज्य प्राधिकरण समिति से अनुमति ली गई।
दो अलग-अलग ऑपरेटिंग कक्षों में सुल्ताना और सुषमा पर अलग-अलग डोनर नेफरेक्टोमी यानी किडनी निकलने की प्रक्रिया की गई। इसके बाद किडनी को क्रमश: विकास और अशरफ में ट्रांसप्लांट किया गया। जटिल ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट हो गया। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद सभी चारों सामन्य रूप से काम कर रहे है। दोनों परिवार खुश हैं।
मास्टर केमिस्ट अंग है किडनी
हिमालयन अस्पताल के वरिष्ठ यूरोलजिस्ट डॉ. किम जे मामिन ने बताया कि गुर्दे हमारे शरीर के मास्टर केमिस्ट और होम्टोस्टेटिक अंग होते हैं। शरीर में रक्त साफ करने की प्रक्रिया के साथ पानी की मात्रा को संतुलित करना, रक्तचाप, मधुमेह को नियंत्रित करना, शरीर से अवशिष्ट विषैले पदार्थो को मूत्र द्वारा बाहर करना और आवश्यक पदार्थ विटामिन, मिनरल कैल्शियम पोटेशियम, सोडियम आदि वापस शरीर में पहुंचकर इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करना इसका कार्य है।
कुलपति और चिकित्सा अधीक्षक ने दी टीम को बधाई
सर्जरी को सफल बनाने में वरिष्ठ यूूरोलॉजिस्ट डॉ. किम जे मामिन, वरिष्ठ इंटरवेंशनल नेफ्रोलाजिस्ट डॉ. शहबाज अहमद, एनिस्थिसिया विभागाध्यक्ष डॉ. वीना अस्थाना, डॉ. राजीव सरपाल, डॉ. शिखर अग्रवाल और डॉ. विकास चंदेल को योगदान रहा। कुलपति डॉ. विजय धस्माना और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएल जेठानी ने किडनी के सफल ट्रांसप्लांट के लिए टीम को बधाई दी।