विदेशों में स्कूलों में बच्चों की आउटडोर एजुकेशन पर बहुत ध्यान दिया जाता है। इसमें आवासीय या जंगल आधारित यात्रा के अनुभव शामिल होते हैं। जिसमें छात्र विभिन्न प्रकार की साहसिक चुनौतियों और बाहरी गतिविधियों जैसे लंबी पैदल यात्रा, चढ़ाई, कैनोइंग, रस्सियों के पाठ्यक्रम और समूह खेलों में भाग लेते हैं। यह पर्यावरण शिक्षा, सिद्धांत पर आधारित है और बच्चे प्रकृति से ही सीखते हैं।
देशभर के बड़े पर्वतारोही जुटेंगे
हिमांशु और यश ने बताया कि वह इस तरह का आयोजन करने की तैयारी में हैं, जिसमें देशभर के पर्वतारोही जुटेंगे। पर्वतारोही इस क्षेत्र की संभावनाओं से लोगों को परिचित कराएंगे। इस आयोजन के जरिये लोगों को उनके सवालों के जवाब मिलने में आसानी होगी।
आउटडोर एजुकेशन एडवेंचर का ही पार्ट है। विदेशों में बच्चों की आउटडोर एजुकेशन पर बहुत ध्यान दिया जाता है। स्कूल और यूनिवर्सिटी पूरी प्लानिंग इसे लेकर करती हैं। मेरा उद्देश्य है कि मैं उत्तराखंड में आउटडोर एजुकेशन डेवलप कर सकूं। विल्डरनेस बैग पैकिंग इसी का हिस्सा है। मुझे लगता है कि हमारे राज्य में तो इसकी अपार संभावनाएं है। मैंने बहुत साल बच्चों के साथ आउटडोर एजुकेशन पर काम किया है।
-हिमांशु थापा, आउटडोर लीडर
कर्नाटक, बंगलूरू, वियतनाम में मैंने बतौर आउटडोर इंस्ट्रक्टर काम किया है। मेरा मकसद है कि देहरादून सहित राज्य में रॉक क्लाइंबिंग प्लेस डेवलप कर सकूं। विदेश में लोग इसे लेकर बहुत जागरूक हैं। क्योंकि वहां पर बहुत सालों से यह होता आ रहा है। यहां पर रॉक क्लाइंबिंग कम है। इसलिए हमने यहां पर इसे विस्तार देने के बारे में सोचा। मैं यहां पर रॉक क्लाइंबिंग के लिए लड़कियों में खासा उत्साह है। एडवेंचर का मतलब लोग सिर्फ ट्रेकिंग समझते है, लेकिन कॅरिअर के रूप में देखें तो इसका बहुत बड़ा स्कोप है। उत्तराखंड में तो खासतौर पर अपार संभावनाएं है। बस इन्हें विकसित करने की जरूरत है।
-यश चौधरी, आउटडोर इंस्ट्रक्टर
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