राजाजी टाइगर रिजर्व में हाथी, बाघ, तेंदुआ, भालू, हिमालयन काला भालू, बार्किंग हिरण, कांकड़, घुरल, सांभर, जंगली सुअर समेत स्तनधारी जीवों की 49 प्रजातियों के वन्यजीव हैं। इसके अलावा किंगफिशर, कठफोड़वा, फायर टेल्ड सनबर्ड ग्रेट पाइड हार्नबिल, मटर मुर्गी, गिद्ध , तीतर, बारबेट, समेत पक्षियों की 328 प्रजातियां हैं।
1075 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला राजाजी टाइगर रिजर्व अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। वन्यजीवों और पक्षियों के साथ ही राजाजी टाइगर रिजर्व में किंग कोबरा, अजगर, मगरमच्छ समेत सरीसृप की 20 प्रजातियों के जीव भी हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों, पक्षियों, सरीसृपों के अलावा 60 प्रकार की जड़ी बूटियां और पेड़ में 118 प्रजातियां पाई जाती हैं। साल 1983 में राजाजी टाइगर रिजर्व को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और स्वतंत्र भारत के दूसरे गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी के नाम इसका नाम राजाजी टाइगर रिजर्व रखा गया।
सफारी संचालकों को टाइगर रिजर्व में भी कराना होगा पंजीकरण
पर्यटकों को सफारी कराने वाली वाहनों को अब परिवहन विभाग के बाद जिम कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में भी पंजीकरण कराना होगा। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की ओर से जारी आदेश के मुताबिक अब प्रदूषण समेत तमाम मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहनों को टाइगर रिजर्व से बाहर किया जाएगा।
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के अतिरिक्त महानिदेशक (व्याघ्र परियोजना) व प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. एसपी यादव की ओर से मुख्य वन्यजीय प्रतिपालक को भेजे गए आदेश के अनुसार जिम कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक सफारी करने आते हैं।
ऐसे में सुनिश्चित कराया जाए कि दोनों टाइगर रिजर्व में जिन सफारी वाहनों का संचालन किया जा रहा है वे परिवहन विभाग के तमाम मानकों को पूरा करते हों। साथ ही टाइगर रिजर्व में प्रदूषण मानकों पर खरे उतरने वाले वाहनों का प्रवेश ही सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जिम कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में संचालित सफारी वाहनों का पंजीकरण परिवहन विभाग के साथ ही दोनों टाइगर रिजर्व के कार्यालयों में भी कराया जाए।
उपनल के जरिए नियुक्ति किए जाने के साथ ही एएसआई और ईपीएफ में कटौती किए जाने की मांग उठाते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व के 250 से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने आंदोलन कर दिया है। आंदोलित कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार करने के साथ ही राजाजी टाइगर रिजर्व निदेशक से भी वार्ता की। हालांकि निदेशक से वार्ता के बाद कुछ कर्मचारी तो ड्यूटी पर लौट आए, लेकिन कई कर्मचारी ड्यूटी से नदारद हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक का कहना है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को उपनल के जरिए नियुक्ति किए जाने का अधिकार वन मुख्यालय और टाइगर रिजर्व निदेशक स्तर पर नहीं किया जा सकता। इस संबंध में कोई भी निर्णय शासन स्तर पर ही किया जा सकता है। इतना ही नहीं टाइगर रिजर्व देशभक्ति के सिंह का कहना है कि टाइगर रिजर्व में पहले से ही निर्धारित मानकों से बहुत अधिक संख्या में कर्मचारी ड्यूटी दे रहे हैं ऐसे में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को उपनल के जरिए नियुक्त किए जाने का प्रश्न ही नहीं उठता है।
वहीं आंदोलित कर्मचारियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए रखे जाने की वजह से उनका आर्थिक शोषण हो रहा है। कर्मचारियों का ना तो ईएसआई और ना ही ईपीएफ में कटौती की जा रही है। आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्ति होने से उनके वेतन में भी कमी है। ऐसे में यदि तमाम कर्मचारियों को उपनल के जरिए नियुक्ति की जाती है तो उन्हें आर्थिक लाभ होगा। बता दें, राजाजी टाइगर रिजर्व में पहले ही निर्धारित मानकों से अधिक संख्या में कर्मचारी ड्यूटी दे रहे हैं।
नियुक्तियों को लेकर विवादों में रहा टाइगर रिजर्व
कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर राजाजी टाइगर रिजर्व पहले भी विवादों में रहा है। टाइगर रिजर्व मे पूर्व में तैनात अधिकारियों ने तमाम प्रावधानों को दरकिनार करते हुए कर्मचारियों की स्थायी नियुक्तियां कर दी थीं। प्रकरण उजागर होने के बाद शासन स्तर पर इसकी जांच करायी गई थी और जांच अनियमितता पाए जाने के बाद कर्मचारियों को बाहर का भी रास्ता दिखाया गया था।