शिक्षा मंत्री ने बैठक में यह भी निर्देश दिए कि स्कूलों को सैनिटाइज करने की प्रक्रिया हर दिन प्रत्येक पाली के बाद नियमित रूप से की जाए। स्कूलों में सैनिटाइज, हैंडवाश, थर्मलस्कैनिंग एवं प्राथमिक इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
यदि किसी बच्चे या शिक्षक को खांसी, जुकाम, बुखार के लक्षण हैं तो उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए वापस घर भेज दिया जाए। बच्चों को हैंडवॉश कराने के बाद ही स्कूल में प्रवेश दिया जाए। इसके अलावा स्कूल के मेन गेट पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाए।
एक साथ सभी बच्चों की छुट्टी न की जाए। बैठक में शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि स्कूल में बच्चों की छह फिट की दूरी पर बैठने की व्यवस्था की जाए। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों को उनके अभिभावकों की लिखित सहमति के बाद ही स्कूल में बुलाया जाए। बैठक में शिक्षा मंत्री ने शिक्षा निदेशक को स्कूल खोलने से पहले वेबिनार के माध्यम से मुख्य शिक्षा अधिकारियों एवं खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ स्कूल में छात्र छात्राओं की सुरक्षा के संबंध में आवश्यक निर्देश देने को कहा।
प्रदेश के 10वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं के लिए दो नवंबर से स्कूल खुल रहे हैं। एसओपी जारी होने के बाद शिक्षा निदेशक की ओर से इस संबंध में समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
शिक्षा निदेशक आरके कुंवर की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन और एसओपी का पूरी तरह से पालन किया जाए। निर्देश में कहा गया कि प्रत्येक स्कूल के प्रिंसिपल अपने स्कूल के नोडल अधिकारी होंगे और एसओपी के आधार पर अपने स्कूल की मानक संचालन प्रक्रिया की तीन दिन के भीतर रूपरेखा तैयार कर मुख्य शिक्षा अधिकारियों को भेजेंगे।
इसके अलावा अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार है तो इससे भी अवगत कराया जाए। उन्होंने कहा कि स्कूल खुलने से पहले विभिन्न माध्यमों से इसकी जानकारी दी जाए।
शिक्षा निदेशक ने कहा कि एसओपी का पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ महामारी अधिनियम की संगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए। वहीं स्कूल खोलने से पहले खंड शिक्षा अधिकारी, उप शिक्षा अधिकारी, प्रिंसिपल एवं शिक्षकों के सहयोग से हर स्कूल का स्थलीय निरीक्षण कर लिया जाए।