उत्तराखंड एसटीएफ ने बीते आठ मार्च को किरठल के साथी सतेंद्र मुखिया को पकड़ा था। मुखिया पर 25 मुकदमे दर्ज हैं। वह किरठल का दायां हाथ माना जाता है। इसके बाद से उत्तराखंड और यूपी दोनों जगहों की एसटीएफ किरठल की तलाश कर रही थी। सतेंद्र मुखिया भी जघन्य अपराधों में किरठल के साथ रहा है।
बदमाशों के लिए सुरक्षित है देवभूमि?
इस तरह के ऑपरेशन के बाद हर बार सवाल उठने लगते हैं कि क्या वाकई देवभूमि उत्तराखंड बदमाशों की पनाहगाह है? कोई भी बड़ा छोटा बदमाश उत्तराखंड में छिप सकता है। किरठल के पकड़े जाने के बाद इस बात को फिर से बल मिल गया है। हालांकि, इस बात को लेकर उत्तराखंड पुलिस के मुखिया नाराजगी जता चुके हैं कि कोई उत्तराखंड को बदमाशों की पनाहगाह कहे। इसके लिए उन्होंने प्राथमिकता के तौर पर एसटीएफ और जिलों की पुलिस को बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए हर वक्त मिशन मोड में रहने को कहा है। बावजूद इसके इतने बड़े बदमाश का राजधानी दून में रहना पुलिस की सख्ती और खुफिया तंत्र को चुनौती देने वाली बात है।
पिछले साल साझा हुई थी बदमाशों की सूची
उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने उत्तराखंड एसटीएफ से बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए सहयोग मांगा था। इसके लिए दोनों राज्यों ने अपने-अपने यहां के बदमाशों की सूची साझा की थी। ताकि, यदि कोई भी कहीं भी पनाह लेता है तो इसकी जानकारी साझा करते हुए बदमाश की तत्काल गिरफ्तारी की जा सके।