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उत्तराखंड: भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला मलारी हाईवे तीन दिन से बंद, कई गांवों की आवाजाही हुई ठप

Mon, 16 Aug 2021 08:49 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ

सार

बता दें कि जोशीमठ-मलारी हाईवे पर शुक्रवार को सुराईथोटा और तमक के बीच भूस्खलन होने से यातायात ठप हो गया था। बीआरओ की जेसीबी हाईवे खोलने में जुटी हैं।
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मलारी हाईवे पर भूस्खलन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला मलारी हाईवे तीन दिनों से बंद पड़ा है। हाईवे पर तमक स्थान पर पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिससे सेना के साथ ही दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही ठप हो गई है।

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जोशीमठ-मलारी हाईवे पर शुक्रवार को सुराईथोटा और तमक के बीच भूस्खलन होने से यातायात ठप हो गया था। बीआरओ की जेसीबी हाईवे खोलने में जुटी हैं, लेकिन पहाड़ी से लगातार मिट्टी और पत्थर गिर रहे हैं, जिससे हाईवे खोलने में दिक्कत हो रही हैं।

हाईवे बंद होने से सेना और क्षेत्र के कई गांवों के लोगों की आवाजाही ठप पड़ी है। स्थानीय निवासी लक्ष्मण बुटोला का कहना है कि हाईवे बंद होने से जरूरी सामान लाने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को बीमार लोगों को पहुंचाने और स्थानीय लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए कोई विकल्प तैयार रखना चाहिए।
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भूस्खलन से पंचम केदार कल्पेश्वर मंदिर को खतरा 
पंच केदारों में पंचम केदार कल्पेश्वर मंदिर के शीर्ष भाग से हो रहे भूस्खलन से मंदिर को खतरा हो गया है। यदि समय रहते यहां सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं किया गया तो मंदिर परिसर भूस्खलन की चपेट में आ जाएगा। बीते दिनों हुई भारी बारिश से कल्पेश्वर मंदिर परिक्रमा मार्ग से भूस्खलन शुरू हुआ, जो आगे खतरा बन सकता है। जोशीमठ प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष अनूप नेगी ने बताया कि मंदिर के शीर्ष भाग से पीएमजीएसवाई की ओर से सड़क निर्माण किया जा रहा है।

भारी बारिश के दौरान यहां भूस्खलन शुरू हो गया था, लेकिन अभी तक भूस्खलन की रोकथाम के लिए कोई उपाय नहीं किए गए हैं। उन्होंने मंदिर की सुरक्षा के लिए सड़क के नीचे बाढ़ सुरक्षा कार्य शीघ्र करने की मांग उठाई। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि कल्पनाथ मंदिर का निरीक्षण किया जाएगा। यहां बाढ़ सुरक्षा कार्य का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। 

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भूस्खलन जोन में बना पंचकर्म भवन धंसा

जनता की गाढ़ी कमाई का एक और उदाहरण बड़कोट में सामने आया है। महज सात साल पहले 58 लाख रुपये की लागत से बना आयुर्वेदिक चिकित्सालय की पंचकर्म यूनिट का भवन भू-धंसाव की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया है। इस भवन के निर्माण से पहले विभाग ने भू-वैज्ञानिक सर्वे तक नहीं कराया गया था। इस पर अमर उजाला ने शुरुआत में ही ‘भूस्खलन जोन में बन रहा भवन’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर विभाग और प्रशासन को चेताया था। इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी और आज नतीजा सामने है।

नगर पालिका क्षेत्र में आपदा के लिहाज से संवेदनशील वार्ड नंबर सात में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से वर्ष 2015 में 58 लाख की लागत से पंचकर्म यूनिट के भवन का निर्माण शुरू हुआ था। निर्माण से पहले सर्वे तक नहीं कराया गया। इसका असर यह हुआ कि भवन के लिए बनी एप्रोच रोड व सुरक्षा दीवार में दरारें पड़ने लगीं। इसके बावजूद वर्ष 2018 में आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने आनन-फानन में भवन का लोकार्पण करवा दिया था। 

15 अगस्त को सुबह नौ बजे अचानक सीमेंट से बनी एप्रोच रोड, सुरक्षा दीवार ध्वस्त होने के साथ ही भवन भी क्षतिग्रस्त हो गया। लाखों की लागत से बने भवन के एक हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा है। साथ ही भवन के आगे-पीछे का हिस्सा भी भू-धंसाव की चपेट में आ गया है। भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष कृष्णा राणा ने इसे बड़ी लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि यहां बिना परीक्षण निर्माण करवाकर सरकारी बजट का दुरुपयोग किया गया है।  

दीवार व एप्रोच रोड ढहने से मलबा यूनिट की निचली मंजिल तक पहुंच गया है। इसकी सूचना प्रशासन व विभाग के अधिकारियों को दी गई है। 
-डॉ. भगवान सिंह रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी।
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