जनता की गाढ़ी कमाई का एक और उदाहरण बड़कोट में सामने आया है। महज सात साल पहले 58 लाख रुपये की लागत से बना आयुर्वेदिक चिकित्सालय की पंचकर्म यूनिट का भवन भू-धंसाव की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया है। इस भवन के निर्माण से पहले विभाग ने भू-वैज्ञानिक सर्वे तक नहीं कराया गया था। इस पर अमर उजाला ने शुरुआत में ही ‘भूस्खलन जोन में बन रहा भवन’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर विभाग और प्रशासन को चेताया था। इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी और आज नतीजा सामने है।
नगर पालिका क्षेत्र में आपदा के लिहाज से संवेदनशील वार्ड नंबर सात में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से वर्ष 2015 में 58 लाख की लागत से पंचकर्म यूनिट के भवन का निर्माण शुरू हुआ था। निर्माण से पहले सर्वे तक नहीं कराया गया। इसका असर यह हुआ कि भवन के लिए बनी एप्रोच रोड व सुरक्षा दीवार में दरारें पड़ने लगीं। इसके बावजूद वर्ष 2018 में आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने आनन-फानन में भवन का लोकार्पण करवा दिया था।
15 अगस्त को सुबह नौ बजे अचानक सीमेंट से बनी एप्रोच रोड, सुरक्षा दीवार ध्वस्त होने के साथ ही भवन भी क्षतिग्रस्त हो गया। लाखों की लागत से बने भवन के एक हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा है। साथ ही भवन के आगे-पीछे का हिस्सा भी भू-धंसाव की चपेट में आ गया है। भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष कृष्णा राणा ने इसे बड़ी लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि यहां बिना परीक्षण निर्माण करवाकर सरकारी बजट का दुरुपयोग किया गया है।
दीवार व एप्रोच रोड ढहने से मलबा यूनिट की निचली मंजिल तक पहुंच गया है। इसकी सूचना प्रशासन व विभाग के अधिकारियों को दी गई है।
-डॉ. भगवान सिंह रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी।