सूखे की मार से पिछले साल से ज्यादा जले जंगल
जंगल की आग के कारणों से जुड़े प्रश्न पर हॉफ ने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण मौसम है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में अप्रैल महीने में पूरे प्रदेश में 60 मिमी बारिश हुई थी। जबकि अप्रैल 2024 में 6 मिमी बारिश हुई। पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी ही बारिश हो पाई। ड्राई स्पैल लंबा होने से स्थिति बिगड़ी। पिछले साल सात मई तक वनाग्नि की 295 घटनाएं हुई थीं और 353.01 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था। जबकि 2024 में इस अवधि तक 975 घटनाओं में 1298.72 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। 2021 और 2022 में वनाग्नि बहुत अधिक भीषण थी। 2021 में 2434 घटनाएं हुईं और 3448.87 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। 2022 में 1931 घटनाएं हुईं 3094.09 हेक्टेयर जंगल में आग लगी। उन्होंने खेतों में पराली जलाने व पिरूल को भी एक बड़ा कारण बताया।
स्थानीय परंपराओं पर लौटेगा विभाग
विभाग ने तय किया है कि जंगल की आग बुझाने का जो स्थानीय पारंपरिक तरीका था, उसे अपनाया जाएगा। स्थानीय पंरपराएं पुनर्जीवित होंगी, जिसमें फायर लाइन कों साफ-सफाई को जनसहभागिता से सुनिश्चित किया जाएगा। जंगल की आग पर काबू पाने के लिए विभागीय कर्मचारियों के साथ वन पंचायत, स्थानीय सामुदायिक संस्थानों को चिन्हित कर उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा।
कितने पेड़ जलें दो दिन में पता चलेगा
वनाग्नि में कितने पेड़ों को क्षति पहुंची और कितने पूरी तरह से नष्ट हो गए, इस प्रश्न के उत्तर में हॉफ ने कहा कि इसकी रिपोर्ट मांगी गई है। फील्ड में कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया गया है। दो दिन में इसकी रिपोर्ट आ जाएगी।
बड़े अफसरों पर एक्शन क्यों नहीं?
वनाग्नि बुझाने में लापरवाही को लेकर केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई के सवाल हॉफ ने कहा कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। यदि बड़े अधिकारी लापरवाही करेंगे तो उनके खिलाफ भी एक्शन होगा। बड़े वन्यजीवों को नुकसान पर उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसी कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।