विश्व स्तर पर भूस्खलन प्रबंधन में कार्य कर रहे संस्थानों के साथ सहभागिता कर के अपनी-अपनी तकनीक और शोध डाटा का आदान-प्रदान कर भूस्खलन न्यूनीकरण और प्रबंधन की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए। भूस्खलन की शिक्षा और शोध कार्यों से जुड़े संस्थानों के छात्रों को अपने संस्थान में इंटर्नशिप का प्रावधान रखा जाए। मुख्य सचिव ने वानिकी अनुसंधान संस्थान (एफआरआई), वन विभाग और यूएलएमएमसी के मध्य आपसी सहयोग के लिए एमओयू करने के निर्देश दिए। जिससे एफआरआई के सहयोग से ऐसे पौधों की प्रजातियों के उगाने में सहयोग लिया जा सके, जो भूस्खलन रोकने में सक्षम हैं।
यूएलएमएमसी की ओर से किए गए अध्ययनों के माध्यम से एक डिजिटल मैप तैयार किया जाए। जिससे आवश्यकता पड़ने पर किसी भी विभाग को इसमें से किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल करनी हो एक क्लिक में उपलब्ध हो सके। बैठक के दौरान यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने यूएलएमएमसी के अगले पांच वर्षों का रोडमैप मुख्य सचिव के समक्ष रखा। इस मौके पर सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, अपर सचिव डॉ. अहमद इकबाल, विनीत कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।