दूसरे साल तीन-तीन मीटर की दूरी पर पेड़ उगाने के लिए बीज दिए गए। इन तीन मीटर के बीच की दूरी में किसान अपने लिए फसल उगाकर गुजारा करते थे।
आजादी के बाद देखा गया कि वनीकरण के नाम पर माफिया ने जमीनों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है तो इस पद्धति को खत्म कर दिया गया। तभी से ये परिवार वन विभाग की ओर से दी गई जमीनों पर खेती तो कर रहे हैं, लेकिन जमीनों के सभी अधिकार वन विभाग के पास हैं।
वर्तमान में हरिपुर टोंगिया की आबादी तकरीबन 1200 है। इन लोगों को सरकार चुनने का अधिकार नहीं है। गांव और खेती की जमीनें वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण यहां विधायक निधि, जिला पंचायत निधि या फिर किसी अन्य सरकारी योजना से सड़कें नहीं बनाई जा सकती हैं। यही कारण है कि सैकड़ों साल बाद भी गांव में एक भी पक्की सड़क नहीं बन सकी है।
इन लोगों के पास पक्के मकान बनाने का भी अधिकार नहीं है, लेकिन फिर भी अधिकांश लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मदद से पक्की छतें जरूर डाल ली हैं।
कुछ साल पहले यहां बिजली की लाइनें भी खींच दी गईं, लेकिन ज्यादातर परिवार आज भी मेहनत मजदूरी कर गुजारा कर रहे हैं। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से भी वंचित हैं। हालांकि नवंबर, 2020 में शासन ने इस गांव को ग्राम पंचायत का दर्जा देने की कवायद शुरू की है।
राजस्व ग्राम के लिए आबादी और जमीन का बनेगा नक्शा
शासन के निर्देश पर हरिपुर टोंगिया को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की कवायद शुरू हो गई है। नवंबर, 2020 में राजस्व और वन विभाग की टीम ने इस संबंध में ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी राय जानी। इस दौरान सभी ग्रामीणों ने राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग की।
वन रेंजर राम सिंह ने बताया कि अब आबादी और जोत की जमीन का सर्वे करने के बाद नक्शा तैयार होना है। भगवानपुर तहसील की ओर से नक्शा तैयार होने के बाद इसे जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। वह इसे शासन में स्वीकृति के लिए भेजेंगे। इसके बाद शासन स्तर से आदेश जारी होंगे।