किसी भी तरह के प्रचार-प्रसार से दूर रुद्र का कहना है कि उन्हें भीड़ नहीं जुटानी है, बल्कि अंदर से तैयार बच्चों को सही दिशा देकर मंजिल तक पहुंचाना है। उनकी एकेडमी से ही अब तक 46 बच्चे अफसर बन चुके हैं, जिनमें से 14 उत्तराखंड के हैं।
सेवानिवृत्त के बाद उन्होंने गांव के पास गैरखेत में 13 नाली जमीन लेकर मिनी एकेडमी की शुरुआत की। उनके सानिध्य में कई युवा सेना के सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) के इंटरव्यू का 15 दिवसीय प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इन बच्चों में गुजरात, हिमाचल, जम्मू, हरियाणा, यूपी, बिहार और पंजाब के बच्चे शामिल हैं। इनमें गरीब पारिवारिक पृष्ठभूमि के तीन मेधावी बच्चों से वह शुल्क नहीं लेते, उनका रहना, खाना भी मुफ्त है। पढ़ाई का सिलसिला सुबह पांच बजे से रात दस बजे तक चलता है। इस दौरान खेल, योग, व्यायाम आदि भी होता है।
एकेडमी के संचालन में रुद्र का साथ उनकी पत्नी पंखुड़ी रावत (दीक्षा) भी देती हैं। गुरुकुल की तरह गुरुमाता की तर्ज पर वह छात्रों के खानपान का पूरा ध्यान रखती हैं।
12 घंटे के लिए छात्रों के मोबाइल फोन होते हैं जमा
रुद्र सिंह रावत पढ़ाई के साथ सैनिक अनुशासन का भी पालन करते हैं। खाने, खेलने, जागने, सोने के साथ मोबाइल से बात करने का समय भी निर्धारित है। वह छात्रों के मोबाइल फोन रात नौ बजे से सुबह नौ बजे तक खुद अपने पास जमा करा लेते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से भी पूरे परिसर की कंटीले तारों से तार-बाड़ की गई है। बाहर से देखने पर परिसर सेना की छावनी सा दिखता है।
ऑनलाइन बिक्री का रिकॉर्ड बना चुकी हैं पुस्तकें
रुद्र रावत की दो स्वरचित पुस्तकों का प्रकाशन नोशन प्रेस चेन्नई से हुआ है। ‘अवेकन योरसेल्फ विदिन यू’ और ‘सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी)’ नामक पुस्तकें काफी चर्चा में हैं। सेना को करिअर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच दोनों पुस्तकें काफी लोकप्रिय हैं। ऑनलाइन बिक्री में रिकॉर्ड बना चुकी दोनों पुस्तकों को रेटिंग के आधार पर दिल्ली में हुए विश्व पुस्तक मेले में फ्री एंट्री भी मिली थी।
सैन्य अधिकारी बने परिचितों से मिली जानकारी
प्रशिक्षण ले रहे हरियाणा के जींद निवासी उदय सिंह, गुजरात के बड़ौदा निवासी अमित, यूपी बलिया के राकेश, बिहार के बिलासपुर निवासी सूर्यवंश, जम्मू कश्मीर के पुंछ निवासी साहिब सरदार ने बताया कि उन्हें सैन्य अधिकारी पद पर चयनित अपने कुछ परिचितों के माध्यम से रुद्र के बारे में जानकारी मिली। उनकी किताबों से भी काफी जानकारी मिली।