एसएसजे परिसर के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. जगत सिंह ने बताया कि हंसी मेधावी छात्रा रहीं। पढ़ाई में उनकी काफी रुचि थी। परिसर में पढ़ने के दौरान मैंने अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्हें कुछ समय ट्यूटर भी रखा। हंसी प्रहरी की वर्तमान स्थित से काफी दुख है। उनकी मदद को सभी लोगों को आगे आना चाहिए।
शादी के बाद मायके से संपर्क टूट गया था हंसी का
अपनी मर्जी से शादी के बाद हंसी का मायके रणखिला गांव से संपर्क काफी कम रहा। प्रशासन के अधिकारी जब गांव में मदद के लिए गए तो पता लगा कि वह काफी समय से गांव नहीं आती हैं। एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, डॉ. अजीत तिवारी ने गांव में रहने वाली हंसी की छोटी बहन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुष्पा से उसके बारे में जानकारी ली।
एसडीएम ने बताया कि परिजनों का कहना था कि हंसी ने पिता की मर्जी के खिलाफ 2003 में लखनऊ निवासी नन्हे लाल से विवाह किया। विवाह के बाद हंसी की दिक्कतें बढ़तीं गईं। मायके से भी उसका संपर्क कटा रहा। वर्ष 2004 में हंसी की पुत्री हुई, लेकिन पुत्री को पालने में असमर्थता जताकर मायके में छोड़ गई। हंसी की बेटी नवोदय विद्यालय ताड़ीखेत में 11वीं में पढ़ती हैं। एसडीएम ने बताया कि हंसी का भाई अनुराग दिल्ली में नौकरी करता है।
उसकी माता दिल्ली में अनुराग के साथ रहती हैं। लॉकडाउन पर कुछ समय के लिए घर आई हैं। परिजनों को हंसी के पुत्र होने की कोई जानकारी नहीं है। वह पुत्र को लेकर कभी गांव नहीं आई। परिजनों ने बताया कि जब भी रणखिला गांव आती थी तो जल्दी लौटने की बात कहती थीं कि हरिद्वार में उसे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना है। एसडीएम ने बताया कि पिछले सालों में हंसी को सीएम राहत कोष से सहायता राशि के कई चेक जारी हुए हैं। इनकी तिथि और राशि संबंधी जानकारी जुटाई जा रही है।