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हिंदी हैं हम: एम्स ऋषिकेश में बढ़ रहा हिंदी का मान, संस्थान की गतिविधियों में मिलती है प्राथमिकता 

Wed, 25 Aug 2021 01:04 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश

सार

एम्स संस्थान अपने शोध कार्यों और उपलब्धियों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषा माध्यमों में साझा करता है।
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एम्स ऋषिकेश - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)  ऋषिकेश में राजभाषा हिंदी को बढ़ावा दिया जा रहा है। एम्स में सभी बोर्ड, साइन बोर्ड, नाम पट्ट सूचना पट्ट में हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाएं लिखी हैं।

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एम्स में विश्वस्तरीय चिकित्सक भी मरीजों के साथ बातचीत के दौरान हिंदी भाषा का ही अधिक प्रयोग करते। यहां तक आम बोलचाल में भी हिंदी भाषा का प्रयोग किया जाता है।

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एम्स संस्थान अपने शोध कार्यों और उपलब्धियों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषा माध्यमों में साझा करता है। एम्स के हिंदी सेवी चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी राजभाषा को बढ़ावा देने के प्रबल पक्षधर हैं। हिंदी सेवियों के प्रयासों से मातृभाषा के मान सम्मान में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। 
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हिंदी को सबसे सहज भाषा मानते हैं निदेशक 
एम्स के निदेशक प्रोफेसर रविकांत संस्थान के कामकाज और गतिविधियों में राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं। वे हिंदी को सबसे सहज भाषा मानते हैं। प्रोफेसर रविकांत संस्थान के चिकित्सकों और कर्मचारियों से हिंदी में ही बात करते हैं। वहीं यह भी ध्यान रखते है संस्थान में सभी जानकारी और सूचना से जुड़े पट्ट हिंदी में लिखे हो। वे चिकित्सा विज्ञान में हिंदी बढ़ावा देने की हिमायत करते हैं। 

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